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सपनों की उड़ान

Sunita pushkar • Superstar Writer • Sahitya Ratna

सपनों की उड़ान

मैं एक औरत हूँ, एक गृहणी हूँ,
चूल्हे – चौके में सिमटी, पर मैं भी कुछ सोचती हूँ,
मेरे भी तो सपने हैं I

सबने कहा सपने देखना छोड़ दो, औरत हूँ त्याग करूँ बस ,
मैंने कहा- ये सपने ही तो मुझे जीना सिखाते हैं I
मुझे नहीं चाहिए ये ऊँचे महल, मुझे भी बनानी है अपनी
छोटी सी पहचान I
मुझे भी तो उड़ना है ,मेरी भी कुछ चाहत हैं
मेरी उड़ान मेरी कलम की स्याही में बसी है,
मेरी उड़ान काग़ज़ के जहाज जैसी नहीं l
जब- जब दुनिया ने कहा- ” तुमसे न हो पायेगा ” ,
तब- तब मैंने अपने सपनों को कस कर पकडा I

मेरी उड़ान पंखों से नहीं, हिम्मत से उड़ती है,
ये उड़ान अकेले में रोकर भी, मुस्करा कर चलती है,
टूटकर भी जो फिर से जुड़ जाए,
वहीं तो सपनों की सच्ची उड़ान कहलाती है I

सुनीता पुष्कर

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Author

Muktika Sahityakar