तुम्हारी सादगी पर दिल हार बैठा
तुम्हें देखा तो कुछ कह न सका,
बस चुपचाप तुम्हें निहारता रहा,
तुम्हारी वो हल्की-सी मुस्कान,
मेरे भीतर जाने क्या उतारती रही।
चेहरे पर कोई बनावटीपन नहीं,
फिर भी इतनी खूबसूरती कहाँ से लाती हो,
सादगी से यूँ दिल जीत लेती हो,
और कहती हो, मैं कहाँ खास हूँ।
तुम्हारी आँखों में ठहरी शरारत,
मुझे देर तक अपने पास बुलाती है,
काजल से सजी वो प्यारी आँखें,
बिना बोले ही बहुत कुछ कह जाती हैं।
बालों की वो बिखरी हुई लटें,
जब चेहरे को छूकर गुजरती हैं,
सच कहूँ, उस पल तुम्हारी खूबसूरती,
और भी ज्यादा निखर जाती है।
तुम्हारे गालों की वो मासूमियत,
दिल को जाने क्यों छू जाती है,
होंठों पर आती वो प्यारी हँसी,
मेरी सारी उदासी ले जाती है।
साड़ी में तुम्हारा वो सरल रूप,
जैसे कोई पुराना खूबसूरत गीत,
जिसे सुनते रहने को मन करे,
और फिर भी मन न भरे कभी।
तुम्हारे गहने तो बस बहाना हैं,
असल चमक तो तुम्हारे चेहरे में है,
तुम जितनी बाहर से खूबसूरत हो,
उससे ज्यादा तुम्हारी सादगी में है।
तुम्हें चाहने की वजह ढूँढूँ भी तो कैसे,
तुम खुद ही एक खूबसूरत वजह हो,
सच कहूँ तो अब बस इतना जानता हूँ,
तुम अच्छी लगी और मैं तुम्हारा हो गया।
कुंदन राज दत्ता “निश्छल
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