तुम्हें देखकर प्रेम याद आता है
तुम्हें देखकर प्रेम याद आता है,
वो प्रेम जो कुछ कहता नहीं,
बस सामने बैठकर मुस्कुराता है,
और चुपके से दिल में उतर जाता है।
तुम्हारी सादगी सबसे प्यारी है,
तुम्हें सजने की जरूरत ही कहाँ,
तुम वैसे ही पूरी लगती हो,
जैसे चाँद को चाँदनी की जरूरत कहाँ।
कभी साड़ी में तुम्हें देखा,
तो मन कुछ पल को ठहर गया,
तुम्हारे उस सीधे-सादे रूप पर,
मेरा दिल फिर से फिसल गया।
तुम्हारे बालों की काली घटाएँ,
जब कंधों पर आकर बिखरती हैं,
ऐसा लगता है जैसे रात की खुशबू,
तुम्हारे आसपास ठहरती है।
तुम्हारी आँखों की गहराई में,
मैं अपना सा कुछ ढूँढता हूँ,
तुम्हारी एक मुस्कान के लिए,
जाने कितनी दुआएँ माँगता हूँ।
तुम्हारे गालों की वो मासूम लाली,
बिना कहे दिल छू जाती है,
तुम्हारे होंठों की छोटी-सी हँसी,
मेरी धड़कन बढ़ा जाती है।
तुम्हारे झुमकों की हल्की खनक,
जैसे कोई प्रेमगीत सुनाती है,
और तुम्हारी वो शांत-सी अदा,
मुझे हर बार अपना बना जाती है।
मुझे नहीं पता इसे क्या कहूँ,
मोहब्बत कहूँ या कोई एहसास,
बस इतना जानता हूँ तुम सामने रहो,
तो खूबसूरत लगती है हर साँस।
तुम्हें देखकर बस यही लगता है,
शायद प्यार इतना ही सरल होता है,
जब किसी की सादगी देखकर ही,
दिल उसके नाम का हो जाता है।
कुंदन राज दत्ता “निश्छल”
Whatsapp Number : usp_whatsapp : 7903176571
Support Writer
Agar कुंदन राज दत्ता "निश्छल" ki is rachna ne aapke hriday ko chhua ho, toh unki kalam aur sahityik prayas ko aage badhane hetu ek chhota sa sneha-sammaan bhent karein:








