काशी a beautiful poem on Muktika Publication

शीर्षक-कविता
विषय-काशी

रचना
ये काशी है यहां लोग,
ऐसे ही जीते और मरते है।।

एक तरफ चिता जलती,
एक तरफ शहनाई बजती है।।

सभी भक्त भोले नाथ,
के ही सहारे जीते है।।

कुछ लोग भूखे तो,
कुछ लोग खा के सोते है।।

ये काशी है यहां लोग,
ऐसे ही जीते और मरते है।।

काशी के कण-कण में,
बसे शिव शंभू दिखाई देते है।।

काशी की गलियों में,
जय भोले के नारे सुनाई देते है।।

काशी के घाटों पर खूबसूरती के,
गजब के नज़ारे दिखाई देते है।।

दिवाली के दिनों में,
यहां उतरते चांद सितारे है।।

काशी के बारे में क्या लिखूं,
लिखते-लिखते कागज ही कम पड़ जाएगा।।

ये काशी है यहां लोग,
ऐसे ही जीते और मरते है।।

रचनाकार-एकता चतुर्वेदी✍️

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