गजब हैं भोलेनाथ

गजब है भोलेनाथ, ये दरबार तुम्हारा,

जो भी आया शरण में, वो हो गया तुम्हारा।

न धन की है चाहत, न मान का सहारा,

बस तेरी भक्ति मिले, ये अरदास है हमारा ॥

जटाओं में गंगा, मस्तक पे चंदा,

गले में सजा है नागों का फंदा।

भस्म रमाए, हाथ में त्रिशूल है धारा,

तेरी ही महिमा ने इस जग को है सँवारा॥

गजब है भोलेनाथ, ये दरबार तुम्हारा,

जो आया शरण में, हुआ वो तुम्हारा।

न धन की है चाहत, न मान का सहारा,

बस तेरी भक्ति मिले, मेरा भोलेनाथ है प्यारा॥

कैलाश के वासी, मेरे भोले भंडारी,

तेरी कृपा से ही मिटे संकट ये सारा।

डमरू की धुन पर नाचे ये जग सारा,

हर हर महादेव है गूँजे, काशी में तुम्हारा ॥

काँवड़िया आए, गंगाजल लाए,

तेरे चरणों में शीश झुकाए।

बेलपत्र चढ़ाए, जलधार है बहाए,

मन की मुरादें पाए,आके द्वार तुम्हारे ॥

विष को कंठ में रखकर भी, रहते हो मुस्काते

भक्तों के दुख को पल में हरते।

नीलकंठ बनकर, तुमने जग को है बचाया,

तुमने ही जग में अमर प्रेम सिखलाया ॥

गजब है भोलेनाथ, ये दरबार तुम्हारा,

तेरे नाम से रोशन ये जीवन हमारा।

जनम-जनम तक रहे बस साथ तुम्हारा,

हर हर महादेव—बस गूँजे नाम तुम्हारा॥

स्वरचित ✍

स्वीटी श्रीवास्तव, वाराणसी

Leave a Comment