ये इश्क हाय

ये इश्क हाय

 

ये इश्क का का रोग बड़ा तड़पाए,

जिसे हो जाए उसे बड़ा रुलाए,

एक पल भी चैन ना आए,

कमबख्त ये इश्क का रोग बड़ा तड़पाए,

 

बिना एक दूसरे को देखे रहा ना जाए,

गर ना हो बातें तो दिल घबराए,

दिल को बस चैन उसी पल आए,

जब एक दूसरे का दीदार हो जाए,

 

चाँद मे महबूबा नजर आ आए,

तारो मे आशियाना दिख जाए,

जब बैठे साथ मे दोनो,

तो एक प्यारा सा सपनो का महल बन जाए,

 

इश्क का का रोग बड़ा तड़पाए,

जिसे हो जाए उसे बड़ा रुलाए,

एक पल भी चैन ना आए,

कमबख्त ये इश्क का रोग बड़ा तड़पाए,

 

ये इश्क हाय जिसे भी हो जाए,

जीना उसका मुहाल हो जाए,

सारी दुनिया ही दुश्मन बन जाए,

दो दिलो को जुदा करने मे जुट जाए,

 

दो जिस्म एक जान बन जाए,

बिन एक दूसरे के ना रह पाए,

एक दूसरे के प्यार में डूबे रहते है,

दुनिया से अलग एक दुनिया इनकी बन जाए,

 

इश्क का का रोग बड़ा तड़पाए,

जिसे हो जाए उसे बड़ा रुलाए,

एक पल भी चैन ना आए,

कमबख्त ये इश्क का रोग बड़ा तड़पाए।

कुंदन राज “निश्छल”

Leave a Comment