मेरी जिंदगी की सुई
वहां स्थिर हो गयी
जहां से उसे गति लेनी थी,
मेरी ख़्वाहिशें भी
शीर्ष तक जा कर लौटी,
मुझसे बिछड़ने की उम्मीद लिए,
अब काज़ल की चाहत किसे हो
जब आंखें तूफ़ान से जल रही हो,
मौन बगावत में,
सब बिखरा, उड़ गया धूल बन कर,
सब्र करके भी मिलेगा क्या,
जो यादों का बोझ मन में बस गया,
उससे मुक्ति मिलेगा कैसे!
– Unsung Melody ✌






