मुझे मेरा अपना आकाश चाहिए

मुझे मेरा आकाश चाहिए*

कुछ ज्यादा नहीं,

बस थोड़ा सा एहसान चाहिए।

उठ जाऊं बस कुछ अपनी ही

नजरों में, बस इतना ही सम्मान चाहिए।

गिरूँ तो खुद के दम पे संभलूँ,

किसी के सहारे की बैसाखी न चाहिए।

सपने छोटे हों पर अपने हों,

उधार की उड़ान, वो पहचान न चाहिए।

दे दे बस इतनी सी रोशनी,

कि अंधेरों में भी अपना जहान चाहिए।

मीनू शर्मा(दिल्ली)

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