तुम्हें देखकर फिर से इश्क़ हुआ
तुम्हें देखा तो लगा, जैसे शाम ठहर गई,
तुम्हारी एक मुस्कान पर मेरी नज़र ठहर गई।
इन आँखों में न जाने कैसी कशिश बसी है,
देखूँ तो लगता है, सारी दुनिया यहीं बसी है।
तुम्हारी आँखों की गहराई में उतरना चाहता हूँ,
हर रोज़ थोड़ा-सा और तुम्हारा होना चाहता हूँ।
इन आँखों में जो खामोशी है, वो बात करती है,
बिना कुछ कहे ही दिल से मुलाकात करती है।
तुम्हारे गालों पर जब हल्की-सी मुस्कान आती है,
सच कहूँ, मेरी धड़कन वहीं आकर रुक जाती है।
उन गालों की नरमी का क्या हिसाब लिखूँ,
छू न सकूँ तो कम से कम ख्वाब लिखूँ।
तुम्हारे बाल जब चेहरे पर आकर ठहरते हैं,
लगता है जैसे बादल चाँद से मिलने उतरते हैं।
उन्हें देखकर दिल बस इतना कहता है,
काश, इन बालों में मेरा हाथ यूँ ही रहता है।
तुम्हारी सादगी भी गज़ब का जादू करती है,
बिना श्रृंगार के भी दिल पर राज करती है।
तुम बैठी हो तो महफ़िल को बहाना मिल गया,
तुम्हारी खूबसूरती को एक ठिकाना मिल गया।
तुम्हारे चेहरे की चमक सुबह की पहली किरण है,
तुम्हें देखना मेरे लिए सबसे खूबसूरत पल है।
तुम्हारी हँसी में जैसे कोई मीठी धुन है,
जिसे सुनकर मेरा दिल आज भी बेखुद है।
तुम्हारी हर अदा पर दिल हार जाता हूँ,
तुम सामने रहो तो खुद को भूल जाता हूँ।
तुम्हारे होंठों की मुस्कान बड़ी प्यारी लगती है,
जैसे सूनी शाम में कोई फुलवारी लगती है।
तुम्हारे माथे की वो छोटी-सी बिंदी,
मेरी नज़र में चाँद से भी ज्यादा खूबसूरत लगती।
तुम्हारे कानों के झुमके जब धीरे-धीरे झूलते हैं,
तो लगता है जैसे मौसम भी तुम्हें देखकर झूमते हैं।
तुम्हारी तस्वीर को घंटों निहारता रहता हूँ,
और फिर खुद से तुम्हारी बातें करता रहता हूँ।
पता नहीं ये कैसा असर है तुम्हारी खूबसूरती का,
हर बार दिल करता है फिर से इश्क़ करने का।
तुम बस यूँ ही मुस्कुराती रहना उम्रभर,
मैं तुम्हें यूँ ही चाहता रहूँगा उम्रभर।
कुंदन राज दत्ता “निश्छल”
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