दिन: मंगलवार
तारीख: 25 अगस्त 2026
समय: सुबह 08:30 बजे
विषय: मेरी कलम, मेरी पहचान और सपनों की उड़ान
स्वरचित कविता
कागज़ और कलम का नाता,
हर पल नया सच बताता।
न कोई नकल, न उधार,
मेरा अपना ही संसार।
सन्नाटों को चीरकर,
भावनाओं को सींचकर।
शब्दों से बनती पहचान,
यही मेरी सच्ची जान।
दर्द हो या फिर ख़ुशी,
कलम कभी न हो रुकी।
मंजिलें चाहे दूर हों,
रास्ते सभी मंजूर हों।
सांसों की हर एक डोर,
बढ़े चले हम उस ओर।
सपनों की इस उड़ान में,
नया निखार है जीवन का।
जिंदगी के इस सफर में,
रोज़ नया एक मोड़ है।
ख्वाहिशों के इस मेले में,
दिल का अपना शोर है।
धूप छांव के बीच चलकर,
रास्ता हमने बनाया है।
हर अंधेरे को पछाड़कर,
दीप मैंने जलाया है।
फिसलती सी इन रेत पर,
पैर हमने जमाए हैं।
मुश्किलों के हर दौर में,
हौसले अपनाए हैं।
चुपके से जो बहती हवा,
कोई संदेश लाती है।
टूटे हुए हर एक ख्वाब को,
फिर से वह सजाती है।
अब रुकना नहीं है मुझे,
मंजिल को पाना है।
अपनी इस छोटी सी दुनिया को,
खुद ही महकाना है।
विशेष शायरी
फर्श से अर्श तक का सफर आसान नहीं होता,
जो खुद जलते हैं दीये सा, उनका नाम गुमनाम नहीं होता।
न किसी की नकल है, न किसी का उधार है,
मेरी कलम का हर एक शब्द, मेरा अपना ही संसार है।
— लेखिका रेखा तोमर मैहर




