किताबें कुछ कहना चाहती है Hindi Poetry On Muktika Publication

किताबें कुछ कहना चाहती है।
किताबें करती है बातें,
बीते जमाने की।
दुनिया के इंसानों की,
आज की, कल की।
एक एक पल की।
खुशियों की, ग़मों की।
फूलों की, खुशबुओं की।
जीत की, हार की।
प्यार की, इजहार की।
क्या तुम नहीं सुनोगे?
इन किताबों की बातें,
किताबें कुछ कहना चाहती है।
तुम्हारे पास रहना चाहती है।
किताबों में चिड़ियां चहचहाती है।
किताबों में खेत लहलहाती है।
किताबों में रॉकेट का राज है।
किताबों में साइंस की आवाज है।
किताबों। का कितना बड़ा संसार है।
किताबों में ज्ञान का भरमार है।
किताबें कुछ कहना चाहती हैं,
तुम्हारे पास रहना चाहती हैं।

स्वरचित कविता
डॉ ऋषिका वर्मा
गढ़वाल उत्तराखंड

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