हॉरर लव स्टोरी
शीर्षक – अनामिका
“मेरा नाम राज है मैं ऊटी मे रहता हूँ एक दिन रात मुझे कॉल आई रात को 12 बजे की दोस्त का एक्सीडेंट हो गया है तो मैं रात को दोस्त को एक्सीडेंट की जगह से बाइक मे बैठाकर हॉस्पिटल ले गया उसको भर्ती कराने के बाद उसकी फॅमिली को बुलाकर मैं अपने घर जा रहा था रात को 2 बजे मैं हॉस्पिटल से बाहर निकला तो मुझे हॉस्पिटल के बाहर एक लड़की दिखी जो बारिश मे अकेली खड़ी भीगी सी डरी हुई सी मैंने पूछा क्या हुआ तो बोली मै अपने घर जा रही थी मै एक नर्स हूँ इस हॉस्पिटल काम खत्म करके घर जा रही थी मेरी स्कूटी का एक्सीडेंट हो गया था स्कूटी पूरी तरह ख़राब हो गई है मैंने कहाँ अब रात के 2 बजे स्कूटी ठीक होना आसान नहीं होगा ।
रात को आप कहा जाओगी ऐसा करिए मेरे साथ मेरे घर चलिए सुबह आपकी स्कूटी ठीक करवा दूंगा फ़िर आप सुबह घर चले जाना वो बोली मैं आपको जानती नहीं हूँ मैंने कहाँ डरे नहीं आप हम पर भरोसा कर सकती है फिर हम दोनों घर चल दिए उसके कपड़े सारे भीगे थे काली साड़ी मे रंग गोरा बाल खुले हुए बड़ी बड़ी काली आँखे मानो जैसे ऊपर से नीचे तक ख़ूबसूरती की मिसाल थी वो मैंने कहाँ आप कपड़े बदल लीजिए मेरी बहन का सूट पहन लीजिए उसने लाल रंग का सलवार सूट पहन लिया था लाल सूट मे तो और भी प्यारी लग रही थी मे तो उसे बस देखे जा रहा था वो नजर नीचे करके शर्मा रही थी।
ठण्ड से काँप रही थी मैंने उसके लिए कॉफी बनाई उसके बाद वो हम दोनों ने कॉफ़ी पी बहुत सारी बाते की उसके पापा मम्मी थे उसके घर मे बस वो तीन लोग थे और मेरे घर मे भी मेरी माँ और बहन थी हम तीन थे बाते करते करते रात बीत रही थी फिर उसको नींद आने लगी मैंने कहाँ आप आराम कर लीजिए वो सोफे पर लेट गई और हम पास ही बैठे हुए थे आराम दायक कुर्सी पर उसको देखते देखते कब नींद आ गयी पता नहीं चला फिर सुबह हम उठे मेरी माँ और बहन शादी मे गए हुए थे तो वो उठी किचन मे चली गई चाय पीनी थी उसे मैंने कहाँ आप परेशान ना हो बैठ जाए हम चाय बना देते है।
उसके लिए चाय बनाई उसकी साड़ी सूख गई थी सुबह फिर काली साड़ी पहन ली उसने मैंने कहाँ हमने इतनी बाते की पर आपका नाम पूछना भूल गया फिर उसने बताया मेरा नाम है अनामिका और आपका नाम मैंने कहाँ मेरा नाम राज है ऐसी हमारी दोस्ती भी हो गई सुबह वो लंगराकर चल रही थी मैंने पूछा क्या हुआ बोली रात को मेरा एक्सीडेंट हुआ उसके वजह से चोट लगी थी पैर मे गहरी चोट थी थोड़ा सर मे भी काफ़ी चोट लगी थी तो वो चक्कर खाकर नीचे गिर गई उसको मैंने गोदी मे उठाकर बेड पर लेटा दिया फिर मैंने उसके पैर पर पट्टी बाँधी फिर सर पर पट्टी बाँधने उसके पास गया तो एक अलग सा एहसास हुआ जैसे वो मेरे लिए बहुत ख़ास है।
उससे मिलने के बाद सब बदल गया मेरी दुनिया नई खूबसूरत लगने लगी थी शायद उसकी ख़ूबसूरती सादगी का असर था जो मुझे इतने कम वक़्त मे उससे प्यार हो गया फिर थोड़ा आराम मिला उसको उठी हमारा हाथ थामकर बोली राज आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा आप बहुत अच्छे इंसान हो काश हम आपसे ज़िंदा रहते कभी मिल पाते मगर हमारी किस्मत बचपन से ख़राब है जन्म के बाद माँ मर गई पिता ने पाल पोषकर बड़ा किया और बुढ़ापे मे उनको हमारी जरुरत थी तो हमने उनको अकेला छोड़ दिया।
मैं भी उससे अपने प्यार का इज़हार करना चाहता था मगर जब तक मैं कुछ समझ पाता या कुछ बोल पाता उसे वो मेरा हाथ छोड़ाकर घर से बाहर जाने लगी मैंने कहा कहाँ जा रही हो अनामिका बोली मुझे भूल जाना फिर वो कही गायब हो गई
मैंने उसको बहुत ढूँढा पर मुझे कही नहीं मिली फिर जिस हॉस्पिटल के बाहर मुझे मिली थी मैं वहा गया पता करने तो पता चला अनामिका स्कूटी मे घर जा रही थी तो 2 साल पहले कार से टक्कर होने के वजह से उसका एक्सीडेंट हुआ था और उसकी मौत हो गई थी तब मुझे एहसास हुआ अनामिका की रूह मुझसे मिली थी जिससे से मुझे प्यार हुआ था।
निष्कर्ष – प्यार चाहे 4 दिन का हो या साल भर का मगर प्यार आपकी ज़िन्दगी को खूबसूरत जरूर बना देता है।
स्वरचित लेखिका पूर्णिमा राय उत्तराखंड









