मोहब्बत के साएं में भाग 1

मोहब्बत के साएं में भाग 1 की इस रोमांचक कहानी में आपका स्वागत है। आज वाणी के कॉलेज का पहला दिन है, जो उसके लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।

अब तक तो वह गाँव के स्कूल में पढ़ी थी, और अब उसे शहर जाकर पढ़ना था। स्कूल खत्म होते ही उसने सोचा था कि पढ़ाई छोड़ दे। पर अपने मम्मी-पापा और भाई के समझाने पर वह आगे की पढ़ाई के लिए मान गई।

एडमिशन तक तो भाई उसके साथ गया था, पर आज उसे अकेले बस में सफर करना था। उसका नया कॉलेज गाँव से लगभग 5 किलोमीटर दूर था। उसके मन में एक अजीब सा डर बैठा हुआ था।

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मोहब्बत के साएं में भाग 1: बचपन का वो डरावना ट्रॉमा

वाणी बहुत ही साधारण और सीधी लड़की है, जिसके चेहरे पर हमेशा एक डर दिखाई पड़ता है। आज तक उसे लड़कों से बात करने में डर और संकोच होता है। बस स्टैंड पर खड़ी वाणी बस का इंतजार कर रही थी। वहाँ और भी लड़के-लड़कियां थे, पर वह सबसे दूर खड़ी थी। 

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एक बस आती है, वाणी और सारे लोग चढ़ने लगते हैं। सब सीट के लिए इधर-उधर होने लगते हैं, वाणी को भी एक सीट मिल जाती है। बिना किसी से बात किए, वह खिड़की की तरफ झाँकते हुए कुछ सोचती हुई जैसे कहीं खो गई।

अचानक उसे बचपन का एक दिन याद आया। जब वह छोटी थी, अपने दोस्तों के साथ स्कूल जा रही थी। अचानक वाणी ने किसी को देखा और ऐसे घबराने लगी जैसे वह उससे बहुत डरती हो। उसने अपने दोस्तों से कहा कि वह आदमी चोर है और बच्चों को चुरा कर ले जाता है।

डर के मारे वह सबको एक घर के अंदर ले गई और कहानियां बनाने लगी। उस दिन सभी वाणी की वजह से स्कूल बहुत लेट पहुँचे। बच्चों ने उसके डर को सच मान लिया और शाम को घर आकर सबको यही बताया।

मोहब्बत के साएं में भाग 1

 

डर जो दिल में घर कर गया

वाणी की छोटी बहन ने भी अपनी मम्मी को यह बात सुनाई। उसकी मम्मी और दादी ने वाणी को बहुत समझाया। दादी ने तो वाणी को गले से लगा लिया, जिस पर वह फूट-फूट कर रोने लगी।

वाणी इस हद तक डरी हुई थी कि वह डर उसके अंदर घर कर गया। वह हमेशा खुद को सबसे अलग पाती थी। मम्मी, पापा, दादी, भाई और बहन सब उससे बहुत प्यार करते थे, पर बचपन के उस मानसिक ट्रॉमा से वाणी कभी निकल ही नहीं पाई।

 

नई दोस्त पूर्वी और कॉलेज की मुश्किलें

बस रुकने पर वाणी का ध्यान टूटा। कॉलेज आ गया था और सब उतरने लगे थे। अचानक एक लड़की की नजर वाणी पर पड़ती है, जो अभी भी खिड़की की तरफ एकटक देख रही थी और उसकी आंखें नम थीं।

उस लड़की ने आवाज दी, “सुनो! कॉलेज आ गया है, तुम्हें उतरना है या और कहीं जा रही हो? तुम्हें टिकट के भी पैसे देने हैं। भैया कबसे तुम्हें आवाज दे रहे हैं पर तुम सुन ही नहीं रही हो।”

वाणी खुद को संभालते हुए, आँखों को हल्के हाथों से पोंछकर टिकट के पैसे देकर उतर जाती है। पूर्वी, जिसने वाणी को आवाज दी थी, उसका इंतजार करती है।

वाणी जितनी शांत थी, पूर्वी उतनी ही चंचल और निडर। उसने वाणी से पूछा, “नई हो, क्या विषय लिया है?” वाणी ने सिर हिलाते हुए कहा, “हाँ नई हूँ, बायोलॉजी लिया है।”

पूर्वी ने मुस्कुराकर कहा, “अच्छा, मेरा सेकंड ईयर है मैंने भी बायोलॉजी लिया है। अगर कुछ भी जरूरत पड़े तुम मुझसे पूछ लेना। और अगर तुम्हें कोई परेशान करे तो मुझसे कह देना, दिमाग सही कर दूँगी।”

 

क्लास का पहला दिन और वीर की शरारत

वाणी हाँ में सिर हिला देती है। पूर्वी उसको उसके रूम तक छोड़ देती है। वाणी जैसे ही क्लास में घुसती है, सब उसकी ओर देखने लगते हैं।

पीले रंग का सूट, लाल रंग का दुपट्टा, कोई भी दिखावा नहीं और जरा भी मेकअप नहीं; फिर भी वह बहुत सुंदर दिख रही थी। चेहरे पर थोड़ा सा डर और परेशानी उसे और मासूम बना रहा था। पर जो लोग देख रहे थे, वे सुंदरता को नहीं बल्कि मजाक उड़ाने के लिए देख रहे थे।

तभी एक लड़का, वीर, उसके सामने आता है और कहता है, “और बहन जी कहिए, क्या सेवा करें आपकी?” यह सुनकर सब हँसने लगते हैं। वाणी घबरा जाती है और रोने लगती है। वह चुपचाप जाकर पीछे की सीट पर बैठ जाती है।

 

मोहब्बत के साएं में भाग 1: क्या पूर्वी जान पाएगी सच?

कुछ देर बाद क्लास शुरू हो जाती है। आज पहला दिन था, तो बस इंट्रोडक्शन में ही समय गुजर जाता है। पूरा दिन बीत गया पर वाणी ने किसी से बात नहीं की।

जब घर जाने का टाइम हुआ तो बाहर निकलते ही उसे फिर पूर्वी मिल गई। दोनों साथ में जाने लगे। पूर्वी ने पूछा, “कैसा गया दिन?” वाणी ने जो क्लास में हुआ, सब बता दिया।

पूर्वी ने गुस्से में पूछा, “किस लड़के ने किया? जरूर वीर होगा! तुम्हें मुझे बुलाना था न।” पर वाणी चुप रही। बस पूर्वी ही बातें किये जा रही थी। बस का इंतजार करते-करते वाणी भी थोड़ा खुल गई, पर बहुत नपे-तुले शब्दों में बात कर रही थी।

पूर्वी थोड़ा-थोड़ा समझने लगी थी कि वाणी कैसी है। पर उसका इस कदर डरना उसे गलत ही लगा। उसने सीधे पूछ लिया, “तुम इतना डरती किस बात से हो?”

वाणी कुछ नहीं बोली, बस चुप रही। पूर्वी समझ चुकी थी कि वाणी में कुछ तो अलग है, जरूर वह किसी ट्रॉमा से गुजर रही है, और वह जरूर यह पता करके रहेगी।

क्या पूर्वी पता कर पाएगी कि वाणी को किस चीज का ट्रॉमा है? क्या वाणी इस डर से निकल पाएगी? जानने के लिए आगे बने रहिये हमारी इस कहानी के साथ, अगले भाग में!

लेखिका: ममता जायसवाल

To be continued

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