टूटकर भी निखरना
रेज़ा-रेज़ा बिखरी तो क्या, हिम्मत मेरी टूटी नहीं,
आँधियों के बीच भी उम्मीद मेरी छूटी नहीं।
हर टुकड़े को जोड़कर फिर ख़ुद को सँवार लिया,
ज़िंदगी ने जितना तोड़ा, मैंने उतना निखार लिया।
राहों में काँटे मिले, फिर भी कदम रुके नहीं,
आँखों में आँसू थे, पर सपने कभी झुके नहीं।
जिसने समझा कमज़ोर, उसे वक़्त ने बता दिया,
मैंने हर ठोकर को अपनी ताक़त बना लिया।
अँधेरों ने घेरा तो ख़ुद ही दीप जला लिया,
गिरने का डर था मगर, उठना मैंने सीख लिया।
जो खो गया, उसका कोई मलाल अब नहीं,
अपने भीतर से बढ़कर कोई सवाल अब नहीं।
टूटे हुए ख़्वाबों को फिर रंगों से भर लिया,
बिखरे हुए मन को मैंने विश्वास से भर लिया।
अब ज़िंदगी चाहे जितनी आज़माइशें लाए,
मैं हर बार निखरूँगी, चाहे कितने तूफ़ान आएँ।
स्वरचित
स्वीटी श्रीवास्तव
जज्बातों की पोटली
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Agar Sweety srivastava ki is rachna ne aapke hriday ko chhua ho, toh unki kalam aur sahityik prayas ko aage badhane hetu ek chhota sa sneha-sammaan bhent karein:








