कटते जंगल और हमारा विनाश
एक चेतावनी
आज का विषय बहुत ही ज्वलन्त मुद्दे पर है। आज हमारे जंगल कट कर शायद आधे भी नहीं रह गए हैं। हम जंगलों को काट कर खुद अपने विनाश को आमंत्रित कर रहे हैं।
जंगल कटने से बारिश कम होने लगी है और धरती का तापमान बढ़ने लगा है। जो बारिश होती है उसका एक्दम से बह जाता है। और अपने साथ काफी भूमि को काट कर भी ले जाता है। क्योंकि भूमि को अपनी जड़ों के आगोश में पकड़ कर रखने वाले पेड़ों को हम काट रहे हैं। जब मिट्टी पर से पेड़ों की पकड़ ढीली हो जाती है तो वह हल्की बारिश के पानी में भी बह जाती है और भूमि कटान कर देता है।
जंगलों के कम होने से बारिश कम होने लगी है जिससे अब फ़सल भी उतनी अच्छी नहीं होती। जंगलों के कटने से जंगली जानवर को अपना घर छोड़ना पड़ता है जिससे उनकी संख्या में दिन प्रतिदिन कमी होती जा रही है। उनके घरों को हम इंसान छीन रहे हैं तो अब वे हमारे घरों यानी इंसानी बस्ती में आकर इंसानों का शिकार करने लगे हैं। क्योंकि जंगल कम होने से उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं मिल पा रहा है।

हम कुदरत के बनाये हुए नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और जंगलों को लगातर काट रहे हैं। कुदरत ने इंसान, जानवर सबके लिए कुछ ना कुछ बनाया है। हममे अपना हिस्सा तो ले लिया अब बेजुबान जानवरों का हिस्सा भी खा रहे हैं उनके जंगलों को काट कर। हमें हम जितने पेड़ काटते हैं कम से कम उतने पेड़ तो लगाने ही चाहिए। जब हम एक पेड़ काटते हैं तो उसके बदले एक पेड़ तो अवश्य लगाना ही चाहिए।
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हम इंसान हैं सबसे बुद्धिमान प्राणी। हमें इस होते असंतुलन को समझना चाहिए और इसे कम करने का प्रयास करना चाहिए। वरना जब कुदरत खुद न्याय करने लगेगी तो हमारा अस्तित्व ही मिटने के कगार पर पहुँच जाएगा। जंगल कटने से कुदरत क्या कर सकती है इसका नजारा आजकल आम दिखने लगा है। पहाड़ी इलाकों में कितना भूस्खलन हो रहा है। जब बारिश होती तो छोटा सा नाला भी विकराल रूप ले लेता है और फिर अपने साथ विनाश का जो मंजर हमें दिखाता है उससे हमारा दिल दहल तो जाता है पर फिर भी हम सीख नहीं ले पाते हैं कि हमें प्रकृति के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। जंगल नहीं काटने चाहिए।
अगर इसी तरह जंगल कटते रहे तो वे दिन दूर नहीं जब सब खत्म हो जाएगा और हम हाथ मलते रह जाएंगे क्योंकि हम आज विनाश रूपी ज्वालामुखी के मुहाने पर बैठे हैं और उसके फटने का इन्तजार कर रहे हैं। कि वे फटे और विनाश हो जाय। अगर हम अभी भी सँभल जाएं तो इस विनाश को रोक सकते हैं। पेड़ लगाकर। एक पेड़ धरती माता के नाम पर अवश्य लगाएं। अगर कुछ लोग भी एसी सोच रखेंगे तो हमारे जंगल बरकरार रहेंगे और कुदरत का संतुलन भी।
इसलिए साल में एक पेड़ धरती के नाम पर अवश्य लगाएं और अपने बच्चों को एक स्वच्छ और स्वास्थ वर्धक, उज्ज्वल भविष्य प्रदान करें ना कि विनाश की ओर जाता उनका भविष्य उन्हें दें। अब ये सोचना हम सब का कर्तव्य बनता है। धन्यवाद
भावना भट्ट
प्रस्तुति नंबर -28 (अट्ठाईस )
20-8-26
गुरुवार
स्वरचित और मौलिक रचना






