हकदार नहीं था
वो
समर्पण का मेरे,
किस तरह
फिर उसे
दुआएं देती,
ये मौसम भी
उसके साथ चल रहा था,
जिसके साथ
मेरा पूरा
ख्वाबों का
शहर था!
– Unsung Melody ✌
हकदार नहीं था
वो
समर्पण का मेरे,
किस तरह
फिर उसे
दुआएं देती,
ये मौसम भी
उसके साथ चल रहा था,
जिसके साथ
मेरा पूरा
ख्वाबों का
शहर था!
– Unsung Melody ✌