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भीड़ में अकेलापन : एक दास्तान

भीड़ में अकेलापन : एक दास्तान हजारों चेहरों के बीच भी, अपना कोई नहीं लगता, भीड़ बहुत होती है मगर, दिल फिर भी तन्हा रहता। हर कोई अपने रास्ते में, जाने कहाँ खोया है, किसी की आँखों में हँसी है, किसी का मन रोया है। शहर की इन भागती सड़कों पर, कदम सभी के चलते … Read more

भीड़ में अकेलापन : एक दास्तान

भीड़ में अकेलापन : एक दास्तान

भीड़ में अकेलापन : एक दास्तान शहर में रहने वाले लोगों को देखकर अक्सर लगता है कि यहाँ किसी के लिए अकेलेपन की कोई जगह नहीं होगी। सुबह से रात तक सड़कें भरी रहती हैं। बाजारों में शोर होता है, बसों में भीड़ होती है, चौराहों पर लोग एक-दूसरे से टकराते हुए निकलते हैं। हर … Read more