भीड़ में अकेलापन : एक दास्तान
भीड़ में अकेलापन : एक दास्तान हजारों चेहरों के बीच भी, अपना कोई नहीं लगता, भीड़ बहुत होती है मगर, दिल फिर भी तन्हा रहता। हर कोई अपने रास्ते में, जाने कहाँ खोया है, किसी की आँखों में हँसी है, किसी का मन रोया है। शहर की इन भागती सड़कों पर, कदम सभी के चलते … Read more