बचपन का प्रेम-सुनीता मलिक सोलंकी Love Story on Muktika Publication



“बचपन का प्रेम!”
उस दिन डाॅ कन्हैयालाल नाम के सज्जन घंटे भर से प्रेम के विषय मे चर्चा करते रहे…। सभा में उपस्थित कोई व्यक्ति यदि अन्य कोई टॉपिक  उठा भी दे ,तो सज्जन तुरन्त बोल देते कि – मुझे सुनिए मैं कुछ पूछ रहा हूँ आप लोगों से… !
कमरे में सन्नाटा छा जाता है और वहाँ बैठा  हर शख्स उनकी ओर ताकने लग जाता है जैसे कह रहे हों कहिए जनाब आप क्या कहना चाहते हैं?कमरे में लगभग पांच से सात लोग होंगे शायद !
जनाब 80 वर्ष के लगभग या एकाध साल कम  होंगे। चर्चाएं  प्रेम पर चली उस दिन…। यदि कभी मां बाप या समाज की समस्याओं पर अन्य कोई चर्चा पर आते
तो महाशय फिर से सवाल दाग देते कि- प्रेम सचमुच होता है क्या?  बुढापे तक भी रहता है?  अब उनके मुख से ऐसी बात सुनकर दूसरे सज्जन जो लगभग उन्हीं की उम्र के होंगे या अधिक…! बोले – बात क्या है आज आप प्रेम की इतनी बातें कर रहें हैं तो वें बोले  – भाई आज मेरा जन्म दिन है, यह सुनकर सभी ने खडे होकर क्लेपिंग की और हैप्पी बर्थ-डे सोंग गाकर बधाई दी वरिष्ठ को,, दोनो वरिष्ठों ने हाथ मिलाया हँसी का ठहाका गूंजा….।
और सभी का मूड़ हो गया था कि – आप कन्हैयालाल जी की प्रेम कहानी ही सुनेगे बस!

और तभी वाह! आज तो भाई का जन्म दिन है, दूसरे जो बर्थ-डे पुरूष की समान आयु वाले पुरूष थे उन्होंने धर्म पत्नी को आवाज दी अजी सुनती हो! जरा मुहं मीठा कराओ भाई का जन्म दिन है….।क्योंकि यह मजमा
उन्हीं की बैठक में लगा था।

तभी कन्हैयालाल जी बुदबुदाए कि- वो अभी जिंदा है और आज उसने मेरे मुहं पर थप्पड़ मारा…! यह सुनकर सभा में पल भर को सन्नाटा छा गया । कि ‘ऐं” ये कह क्या रहें हैं! कौन है? जो जिंदा है ? और आपको  कोई थप्पड कैसे मार सकता है?
किसने….! सब हक्के बक्के से हो इंतजार करने लगे कि-
महाशय अब बोले –तब बोले–
तभी एक 50 वर्षीय महिला बात सँभालते हुए बोली- क्या हुआ सर! किसकी बात कर रहें है,, आपको कौन थप्पड मार सकता है भला!
सज्जन बोले, मिसेज खन्ना! क्या थप्पड सचमुच में मारना ही थप्पड है?
मिसेज खन्ना बोली ,ये बात तो सही कही सर आपने!
मगर फिर भी हम सबको उत्सुकता बन गयी है अब
अरे आज उसने….।यह कहते कहते वह रूक गये और रूंआसे हो गये…!

हमने भी पहली बार किसी बुजुर्ग को बचपन का प्रेम स्वीकारते देखा! और प्रेम में रूँआसा देखा!हिम्मत की तो बात है यह , इस उम्र में प्रेम स्वीकारना और वो भी जब ! जब कि बुजुर्ग की पत्नी भी जिंदा है ।

मगर प्रेमिका भी कहीं जिंदा है वें इस रहस्य को जानकर  मिलने को आतुर हुए और फोन मिला बैठे अपनी प्रेमिका को, और तडप उठे बस झलक देखने मात्र को…!

इस तरह मायूस और रूँआसे बुजुर्ग कि जैसे किसी किशोर का प्यार खो गया हो! जैसे और न जाने क्या छूट गया हो । यह उस बुजुर्ग  व्यक्ति की बात है जिन्होंने हाल ही में पोती की शादी की है!
अद्भुत था सब कुछ बेहद अद्भुत!

मिसेज खन्ना तो जैसे सच जान कर ही दम लेंगी , बोली सर बताइए तो फिर आखिर क्या हुआ , आपसे फोन पे क्या ऐसा कह दिया मेडम ने?
अब हम आपको बिन सच्चाई जाने ना जाने देंगे, और मिसेज खन्ना ने मेज़बान से  आग्रह किया अंकल प्लीज! आप ही पूछिए कन्हैयालाल जी से आगे,  कि आखिर हुआ क्या सर को….?

महिला के कहने पर उन्होने मित्र का हाथ पकड़कर पूछा कि कन्हैयालाल जी  आखिर ऐसा हुआ क्या!

अचानक मिसेज सिन्हा जैसे कुछ समझ गयी हों तो बीच में ही बोली- सर आप किसी से प्रेम करते थे क्या? सज्जन के चेहरे पर दर्द भरी मुस्कान आई। और तुरन्त ही समेट ली गयी।

वह बोली अच्छा ये बताओ आज फोन आपने किया था या आपकी प्रेमिका ने किया था? जन्म दिन पर!वह अब भी झिझक रहे थे।

फिर से मिसेज खन्ना ने कहा तो ये तो बता दो सर पहले छेडा किसने आप दोनो ने एक दूसरे को आज ऐसा क्या कह दिया ? बिन छेड़े कैसा थप्पड? इसबार सज्जन बोले – अरे मैने ही छेड़ दिया था मिसेज खन्ना..।

महिला ने पूछा कहाँ मिली आपको क्या गाँव आई हुई थी? नहीं नहीं कह तो रहा हूँ जो भी हुआ बस फोन पर की बातों के बाद ही हुआ ।

मैने फोन किया तो उसने तुरन्त फोन काट दिया ! यह मेरे मुहं पे थप्पड नहीं तो और क्या है? यह थप्पड उन्हीं के द्वारा आज तीसरी बार  लगा मुझे मिसेज खन्ना!
और बुदबुदाए कि प्रेम क्या राधा कृष्ण जैसा ही होता है ! 
उससे पहले वे कुछ ऐसे सवाल कर चुके थे उन दूसरे पुरूष साथी से कि-भाई ये बता प्यार क्या बुढापे तक भी रहता है ? इस उम्र में कभी  प्रेमिका कहीं मिल जाए तो वह कैसा व्यवहार करेगी! क्या उसे फील होगा? क्या उसे याद आएंगी बाते….।
और यह कहते हुए उठकर चल दिये कि -अब मैं फिर लिखूंगा।

यह सुनकर मिसेज खन्ना ने आग्रह किया कि अभी बैठिए सर थोडा रिलेक्स हो जाइए! आपको घर तक छुड़वा देंगे।
आग्रह पर बैठ गये तो एक शर्त पर बैठता हूँ मिसेज खन्ना कि सोलंकी साहिबा से कहिए से कहिए आप, कि  आज वें अपनी वो “पुरानी सी प्रेमिकाएं ” नामक कविता  सुना दे सभा में ! सुनीता ने अपने फोन में  ढूंढा उस कविता को ,, तो खैर मिल गयी । बेहद इत्मीनान से सुनी उन्होंने इतने अच्छे श्रोता कहाँ मिलते हैं सुनीता यह सोच मन ही मन फूली नहीं समा रही थी कि – मेरी कविता सार्थक हो गयी यदि एक पाठक के भी मन चढ़ गयी।

मिसेज खन्ना ने कहा- ओह! तो सर तभी आप बार बार पूछ रहे थे कि इंसान लेखक कैसे बनता है? क्या प्रेम में चोट खाकर लेखक बनते हैं ! और आपने आज एक विरह रचना भी सुनाई! अब हम समझी!
यह प्रेम की उमड़ घुमड़ यदि 80 वर्षीय पुरूष को सता रही है तो ….! आप  समझ सकते हैं कि प्रेम कभी मरता नहीं  है।…..जरूरी नहीं जैसे तुम प्यार करते हो..
तुम्हारा प्रेमी भी तुम्हें ठीक वैसे ही प्यार जताए..
तो बस सोचो ..सोचो… और सोचते सोचते ही प्रेममयी हुए रहो……..प्रेम मिलता नहीं
बस होता है ।सच ही है कि जीवन ‘फर्ज’ करने से जितना बेहतरीन गुजरेंगा …उतना किसी और ढंग से नहीं….।
हम भी फर्ज करते हैं कि- हर उम्र में प्यार पनपता है , आज सभी को इस उम्र का प्रेम अधिक सच्चाई लिए नजर आ रहा है !

–सुनीता मलिक सोलंकी
मुजफ्फरनगर उप्र

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