Sweety srivastava (Champion)
तुम हमसफ़र क्या हुए
राहों में क्या मिले, हमसफ़र हो गए,
दिल के सूने मकाँ फिर से घर हो गए।
नैन से नैन क्या एक पल को मिले,
अनकहे सिलसिले हमसफ़र हो गए।
तुम हमसफ़र क्या हुए, हम बेमिसाल हो गए,
सूने-सूने दिलों के नए त्योहार हो गए।
बिन कहे जो तुमने पढ़ ली दिल की ज़ुबाँ,
हम जो ख़ामोश थे, तेरे राज़दार हो गए।
तेरी आहट से सोए अरमाँ जाग गए,
बुझे दीपों के भीतर उजाले जल गए।
तेरी एक मुस्कान ने छुआ दिल को यूँ,
सूखे मौसम भी जैसे गुलज़ार हो गए।
जब कभी राह में थककर ठहरने लगे,
तेरे ख़यालों से ही हम सँवरने लगे।
तुमने थामा जो हाथ विश्वास के साथ,
मुश्किलों के सफ़र भी आसान हो गए।
हर सफ़र में कोई मंज़िल मिले, ये ज़रूरी नहीं,
तेरा साथ हो तो रास्ते भी कम तो नहीं।
जिस तरफ़ तुम चले, मन उधर मुड़ता रहा,
तेरे कदमों की आहट के हम घर हो गए।
तुमने माँगा नहीं कोई वादा कभी,
मैंने चाहा नहीं कोई दावा कभी।
बस भरोसे की डोर जो थाम ली हमने,
दो किनारे थे हम, एक राह हो गए।
अब न मंज़िल की चाहत, न राहों का डर,
तेरा साथ ही लगता है अपना-सा घर।
जो अधूरे थे अब तक, पूरे हो गए,
हम अकेले कहाँ थे—कब के तेरे हो गए।
तुम हमसफ़र क्या हुए, ये करिश्मा हुआ,
हर अधूरा-सा पल भी सुनहरा हुआ।
अब तो लगता है, तुमसे जो मिल गई नज़र,
हम उसी एक नज़र में मुकम्मल जहाँ हो गए।
राहों में क्या मिले, हमसफ़र हो गए,
दिल के सूने मकाँ फिर से घर हो गए।
स्वीटी श्रीवास्तव, वाराणसी
© स्वीटी
जज़्बातों की कलम से
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Agar Sweety srivastava ki is rachna ne aapke hriday ko chhua ho, toh unki kalam aur sahityik prayas ko aage badhane hetu ek chhota sa sneha-sammaan bhent karein:







