विषय- खानदानी परिवार की बहु
नवंबर माह जाड़े की बात है घर में शादी का माहौल छाया था लड़के वालों के मुंह से एक ही बात निकल रहा था अरे ! श्याम बाबू तो खर-खानदानी से बहु ला रहे हैं लगता है खूब दहेज मिलने वाले हैं।
परंतु कुछ लोग यह भी अफवाह फैला दिये बहू में कोई कमी होगी भले खानदानी परिवार से हो___ लोगों ने कहा ऐसा क्यों तो कुछ लोगों ने कहा___ क्योंकि लड़का तो ग्रेजुएशन किया है परंतु लड़की पीएचडी करके आ रही है—
ऐसा थोड़ी ना होता है कि लड़का कम पढ़ा लिखा हो और लड़की अधिक पढ़ी-लिखी आ जाए जरूर कोई कमी है।
श्याम बाबू के लड़के देवांश में रस थोड़ी ना टपक रहा है यह सब बातें देवांश पीछे से सुन रहा था बातें सुनकर पलटवार जवाब दिया अरे !आंटी लोग आप सब सही कह रही हो मेरे में कोई खास बात नहीं है परंतु आप यह कैसे भूल गए कि यह लव मैरिज है __कहावत शायद आपने सुनी नहीं है ,”दिल लगी दीवार से तो परी क्या चीज है ?”ठीक वैसे ही मैं और देवांशी एक दूसरे से प्यार करते हैं।
लोग उसे देखकर जवाब सुनकर हक्का-बक्का रह गए ।
जब शादी होकर बहू घर आयी तो लोगों की आंखें फटी की फटी रह गई ___उसकी सुंदरता मानो “चांद भी शर्मा जाए “संस्कारों से परिपूर्ण हमारे देवांशी ऐसी लग रही थी जैसे सीता और राम की जोड़ी—–
शादी के पहले दिन ही देवांशी बहू रसोईया में गयी और सबके मनपसंद का पकवान बनाकर सबका दिल जीत लिया सब खुशी से उसे नेग दिए जा रहे थे परंतु देवांश ने देखा __जो आंटी लोग उपहास बनाई थी वह देवांशी को देखकर मुंह बिचका रही हैं । तभी देवांश बोला आंटी देवांशी पीएचडी ही नहीं हर गुणों से भरी है अभी तो आपने देखा ही नहीं देवांशी के हुनर को —– तभी देवांशी
की सास ने भी जवाब देते हुए बोला डिग्री से खानदान से ऊपर हमारी देवांशी को देखोगे तो पाओगे वह भारतीय संस्कृति और संस्कारों की खान है कोई ऐसी वैसी नहीं खानदानी परिवार के साथ मां-बाप का संस्कार भी झलकता है हमारी बहू में।
तभी देवांशी सबका पैर छूते हुए आशीर्वाद लेकर अपने सासू मां की गोद में सिर रखकर भावुक मन से बोली मां दुनिया के आगे ज्यादा सफाई मत दिया करो क्योंकि लोग हमारे संस्कारों से नहीं बल्कि हमें अपने संस्कारों से जज करते हैं।
देवांशी का पहले दिन जवाब देकर रिश्तेदारी आपस में काना- फुंसी करने लगे किंतु कुछ लोग बोले वाह ! देवांशी बिल्कुल सटीक जवाब दिया बहू हो तो देवांशी जैसी खानदान के साथ-साथ संस्कारों से भी भरी पड़ी ही लानी चाहिए।
देवांशी ने अपने सास को कहा मां यह सारे नेग आप रखो मुझे तो सिर्फ आपके आशीर्वाद की जरूरत है नेग देते हुए देवांशी अपनी सास को स्वयं कमरे में चली गई—–
और देवांश- देवांशी दोनों हंसते हुए अपना गृहस्थ आश्रम की शुरूआत करने में सफल हुए।
ज्योति राघव सिंह
वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
वर्तमान पता – लेह लद्दाख








