खानदानी घर की बहु
मैं अंजली एक बड़े घर की बहू मेरी मां चाहती थी कि मेरी शादी वहां हो जहां बहुत सारा पैसा हो, गाड़ी हो पर वो भूल गई खुशियां सिर्फ पैसों नहीं मिलती लेकिन हम खुश थे पति के साथ अच्छे से ज़िन्दगी गुजर रही थी ऐसी 4 साल बीत गए।
फिर वक्त बदला हालात बदले स्थिति बदली लम्बी बीमारी के चलते पति का निधन हो गया घरवालों ने अपना बेटा खो दिया औऱ हमने अपना पति 4 साल की बेटी है उसके सहारे जी रहे है पैसा है सब ऐसो आराम है हमारे पास मगर हम फिर भी ख़ुश नहीं है।
निष्कर्ष-पैसों से किस्मत नहीं बदल सकते इसलिए पैसा सब कुछ नहीं होता ।
स्वरचित लेखक अजय त्रिपाठी








