खानदानी परिवार की बहु- Purnima Rai family story on Muktika Publication

शीर्षक – खानदानी परिवार की बहु

मै रुमा एक बड़े घर की बहु हूँ मेरे पिता चाहते थे मेरी शादी एक अमीर से हो क्योंकि बड़े घर मे हम ख़ुश रहेंगे पैसा है गाड़ी है बेटी को औऱ क्या चाहिए लपर वो भूल गए पैसा बड़ा घर होने से खुशियाँ नहीं मिलती औऱ भी चीजे जरुरी है सुकून परिवार की एकता परिवार के सदस्य मे प्यार एक दूसरे के लिए वक़्त हो एक दूसरे के लिए परवाह हो मेरे शरीर पर महंगे कपड़े है गहने है फिर भी हम ख़ुश नहीं है।

क्योंकि मेरे पति के पास मुझे देखने का ना तो वक़्त है ना मुझे देने को समय बाहर से देखने मे सब ख़ुश ख़ुश लगते है पर हमारे घर मे किसी के पास एक दूसरे के साथ बात करने का वक़्त नहीं है कोई बिज़नेस मे बिजी है कोई पार्टी मे कोई शराब के नशे मे चूर है परिवार मे किसी को एक दूसरे से कोई मतलब नहीं है सब एक दूसरे से उखड़े उखड़े है सबके दिलो मे प्यार जैसे खत्म हो चूका है क्योंकि सब बस सिर्फ अपने बारे मे सोचते है

निष्कर्ष – बेटियों की शादी महंगा घर देखकर शादी ना करे परिवार के संस्कार परिवार की एकता को देखकर ही शादी करे क्योंकि पैसा जरुरत पूरी करता है लेक़िन खुशियाँ आपको प्यार औऱ सुकून से मिलती है।


स्वरचित लेखिका पूर्णिमा राय रामनगर उत्तराखंड

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