दर्पण ग़ज़ल- डॉ संजीदा खानम शाहीन Beautiful Ghazal on Muktika Publication

विषय दर्पण 
विद्या : ग़ज़ल


दर्पण तो हकीकत से हैरान नज़र आता है।
हीरा है या पत्थर है अंजान नज़र आता है।

दिल की जमी पे देखो पहरे यहां हजारों,
इस ओर हर बशर ही हैवान नजर आता है ।

धोखे मिले हैं इतने किस पर यकीन कर लूं,
इंसान भी यहां अब शैतान नज़र आता है।

दर्पण बता रहा है बदहाली इस जगह की,
पहरा नहीं है कोई वीरान नजर आता है ।

गर्दिश है जिंदगी में मायूसी हर तरफ है,
ठहरा हुआ सा कोई तूफान नज़र आता है।

सूखी ज़मीं तो कब से बंजर दिखाए दर्पण,
अब पूरा इलाका ही बेजान नजर आता है

लौटा दे मुझको दर्पण गुज़रे हसीं नज़ारे,
दिल आज भी उसी पर कुर्बान नज़र आता है।

शाहीन दर्द ए दिल का कोई इलाज ढूंढो,
सीने में एक अजब सा तूफान नज़र आता है।

मौलिक अप्रकाशित स्वरचित
डॉ संजीदा खानम शाहीन ✍️

परिचय

नाम- डॉक्टर संजीदा खानम
उपनाम/साहित्यिक नाम-,शाहीन
माता जी आबिदा बेगम
पिता जी-अब्दुल करीम
जन्मतिथि- 10/05/1984
जन्म स्थान – जोधपुर राजस्थान
शिक्षा बी. ए ,बी. एड , एम. ए, पी. एच डी डी. लिट विद्यासागर
कार्य/पेशा- एक्यूप्रेशर थेरेपिस्ट
अन्य योग्यता – समाज सेवा ,हिंदी लेखन ,नारी शक्ति, वक्ता, ब्यूटी एक्सपर्ट पत्रकारिता मिस इंडिया वॉगस्टार 2025
प्रकाशित कृति- 1 निबंध संग्रह, भारत पाक संबंधो पर ।
2 गजल संग्रह बहते बहते दरिया बोला
3 सांझा संकलन- नारी अत्याचार है एक वेदना
प्राप्त सम्मान- कुल 251राष्टीय,अंतराष्टीय सम्मान
विभिन्न संस्थाओं और अनेक क्षेत्रों में 600 अधिक सम्मान। 300 से अधिक मंचो पर काव्यपाठ ,संचालन ,समीक्षा, अध्यक्षता, मुख्यवक्ता । 200 से अधिक सांझा संकलन में छप चुकी ।
ऑनलाइन, ऑफलाईन प्रतियोगिताओं में सम्मान ।
आकाशवाणी में निरंतर प्रसारण।
पत्र पत्रिकाओं में सतत प्रकाशन।
मिस इंडिया वॉगस्टार 2024
पत्राचार का पता- बंबा बारी गुलजार पूरा काजी साहब की हवेली के पास जोधपुर राजस्थान
मोबाइल नंबर- 9664329176

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