जिंदगी मेरे हिस्से में क्या आया

जिंदगी मेरे हिस्से में क्या आया """""""""""""""""""""""""""""""""""""" ऐ जिंदगी शब्दों में क्या लिखूं मैं जो मेरे हिस्से में आए। हर घड़ी इम्तिहान दे दे के घबराए। उठा पटक जिंदगी के लग रहे झमेले, परिवार में सब होते भी खड़े थे हम अकेले। ऐ जिंदगी तू मेरे हिस्से में हसीन सौगातें लाई , कभी खुशी तो कभी गम बनके छाई। कभी घर में रोशनी तो कभी अंधेरा छाया, ऐ जिंदगी तूने मुझे कैसे मझधार में फंसाया। ऐ जिंदगी तेरी पलटवार को कौन समझ पाया, मेरी खुशियों के खजाने की तुने गजरा बना सजाया। संघर्षों के बादलों में कैसे दिन काटे, पग पग पे अपने वाले बहुत डांटे। ऐ जिंदगी मेरे हिस्से में क्या तूने दुख ही बाटे, कभी फुर्सत में सितारों से करती थी किस्मत की बातें। ऐ जिंदगी अभी मेरे हिस्से में जाने क्या-क्या देखना बाकी है। अभी तो जिंदगी की शुरुआत हुई है ,अभी तो पूरी उम्र बाकी है। वक्त ने जमाने के चक्कर में बहुत उलझाय था , तानाकशी में जकड़ी जिंदगी नं हिसाब अभी बाकी है। प्यासी है जिंदगी प्यार अभी बाकी है दिन बिता मगर मेरे हिस्से की रात अभी बाकी है । """"""''""""""""""""""""""""""""""""" शिशु सिंहल आबूरोड

कविता का खेत

यह कविता एक कवि के उस भाव-संसार की यात्रा है, जहाँ वह शब्दों में सपनों और प्रेम के फूल उगाना चाहता है, लेकिन दर्द और काँटों से सामना होता है। फिर भी उसकी कलम उम्मीद नहीं छोड़ती और नए सृजन की आस बनाए रखती है।

मेरी कलम मेरी पहचान ✍🏼

मेरी कलम सिर्फ शब्द नहीं लिखती, मेरे मन के भावों को आवाज़ देती है। दर्द को शक्ति, मौन को अभिव्यक्ति और सपनों को विश्वास देती है। मेरे लिए कलम ही मेरा स्वाभिमान, मेरी रूह और मेरी सबसे सच्ची पहचान है। ✍🏼❤️