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जिन्दगी

Bhawana Bhatt • Superstar Writer • Sahitya Ratna

जिन्दगी

10 – 10-2026

जिन्दगी क्या है??

जिन्दगी कुछ धूप – छांव जैसी है। जैसे किसी पल धूप रहती है और किसी पल छांव हो जाती है। जिन्दगी भी बिलकुल एसी ही है। आज सुख है हम बहुत खुश रहते हैं। फिर कभी दुख आ जाता है तो हम दुखी हो जाते हैं। जैसे हम भीषण गर्मी में कहीं जा रहे होते हैं तो अगर रास्ते में कुछ छांव मिल जाय तो कितना सुकून मिलता है। फिर छांव के बाद धूप आ जाती है और हम फिर दुखी हो जाते हैं बिना ये सोचे की अभी धूप है तो आगे छांव भी जरूर होगी। ।

जिन्दगी का ये चक्र चलता रहता है। जिन्दगी एक तराजू के दो पलडो़ की तरह है जिसके आप एक पलड़े में अगर कुछ रख दो तो वह नीचे हो जाता है क्योंकि उसमें भार आ जाता है। फिर अगर दूसरे पलड़े में कुछ रख दो तो वह नीचे आ जाता है। ये क्रम तब तक चलता रहता है जब तक दोनों पलडो़ में भार बराबर ना हो जाय।

जिन्दगी भी कुछ एसी ही है। अभी एक पलड़ा ऊपर तो कभी दूसरा पलड़ा ऊपर। हम हमेशा इन दोनों पलडो़ में सामंजस्य स्थापित करने की कोशिश करते रहते हैं। और जब सामंजस्य स्थापित नहीं कर पाते हैं तो निराश होने लगते हैं। हम ये नहीं सोचते जो नियति इस तराजू के पलडो़ को ऊपर – नीचे कर रही है वही इनमें सामंजस्य भी स्थपित करेगी। हम कितना भी कुछ कर लें नियति के आगे हम विवश है कुछ नहीं कर सकते हैं।

मंजिल कहाँ है?

हमें बस चलते जाना है। क्योंकि हमें ना मंजिल का पता है ना रास्ते का। हमारी मंजिल भी नियति तय करेगी और हमारा रास्ता भी वहीं चुनेगी। फिर हम क्यों अपनी मंजिल खुद से तैयार करने में लगे रहते हैं। जबकि हमें पता है हमारी मंजिल एक ना एक दिन नियति हमें जरूर प्रदान करेगी। हमें बस चलते जाना है।

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जिन्दगी को हम समझ नहीं सकते हैं इसलिए जिन्दगी में जो रास्ता नियति दिखाये उस पर आगे बढ़ते जाना है। अपना कर्म हमेशा करते रहना है। तभी नियति भी हमारा साथ देगी और हमें मंजिल तक पहुँचायेगी।

जिन्दगी जीवन चक्र में आगे बढ़ते रहने का सिर्फ एक माध्यम है और इससे ज्यादा कुछ नहीं। विचार कीजिएगा।
धन्यावाद 🙏

Bhawana Bhatt
स्वरचित और मौलिक

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Author

Muktika Sahityakar