प्यार में विश्वासघात

जब तुम्हें दिल ने पहली बार कहा था- ” तुम मेरे हो ” ,

तब आसमान ने भी झुककर सुना था l

तुम्हारी साँसों में बसा था मेरा पूरा जहां,

Or मैंने अपनी हर साँस तुम्हें सौंप दी थी I

पर तुमने उस साँस को भी बेच दिया, किसी और के नाम पर I

जो आँखे सिर्फ मेरे लिए चमकती थी,

उन्हीं में तुमने किसी और का अक्स बसा लिया l

विश्वास तो एक पतला धागा था,

जिसे तुमने एक पल में काट दिया

प्यार तो एक मंदिर था,

जिसे तुमने खुद अपने हाथों से तोड़ दिया l

अब रातें लंबी और सपनें टूटे हुए शीशे जैसे

तुम्हारा नाम लेते ही सीने में दर्द उठता है,

जैसे कोई छुरा घोंप रहा हो l

दिल बस यही सवाल पूछता है-

क्यों किया तुमने ऐसा विश्वासघात?

जवाब सिर्फ होता है खामोशी,

और आँखों में आँसू…..जो अब भी तुम्हारा नाम लेकर गिरते हैं I

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