जब तुम्हें दिल ने पहली बार कहा था- ” तुम मेरे हो ” ,
तब आसमान ने भी झुककर सुना था l
तुम्हारी साँसों में बसा था मेरा पूरा जहां,
Or मैंने अपनी हर साँस तुम्हें सौंप दी थी I
पर तुमने उस साँस को भी बेच दिया, किसी और के नाम पर I
जो आँखे सिर्फ मेरे लिए चमकती थी,
उन्हीं में तुमने किसी और का अक्स बसा लिया l
विश्वास तो एक पतला धागा था,
जिसे तुमने एक पल में काट दिया
प्यार तो एक मंदिर था,
जिसे तुमने खुद अपने हाथों से तोड़ दिया l
अब रातें लंबी और सपनें टूटे हुए शीशे जैसे
तुम्हारा नाम लेते ही सीने में दर्द उठता है,
जैसे कोई छुरा घोंप रहा हो l
दिल बस यही सवाल पूछता है-
क्यों किया तुमने ऐसा विश्वासघात?
जवाब सिर्फ होता है खामोशी,
और आँखों में आँसू…..जो अब भी तुम्हारा नाम लेकर गिरते हैं I






