खानदानी परिवार की बहू- Shalini Family Story on Muktika Publication

खानदानी परिवार की बहू विक्रम और मीनू की मुलाकात एक दोस्त की शादी के फंक्शन में हुई थी। पहली ही मुलाकात में विक्रम मीनू को पसंद करने लगा था। विक्रम एक सेल्स एग्जीक्यूटिव था और मीनू एक स्कूल में बच्चों को डांस सिखाती थी। विक्रम किसी न किसी बहाने स्कूल में जाकर मीनू से मिला … Read more

खानदानी घर की बहु- Dr. Rishika Verma family story on Muktika Publication

डॉ. ऋषिका वर्मागढ़वाल उत्तराखंडविषय खानदानी घर की बहुबनारस शहर में एक परिवार था छोटा सा। जिसमें 2 भाई 1 बहन और माता पिता रहते थे। सबसे बड़ी बहन थी, इसलिए उसकी सबसे पहले शादी हो गई। छोटे भाई ने लव मरीज कर ली। अब बचा, बीच का बेटा। उसके ऊपर सबकी निगाहें टिकी थी। वो … Read more

बचपन की यादें short notes for everyone

बचपन कभी कागज़ की नाव, पतंग की डोर, और लट्टू की लत्ती में बसा था। बारिश की रिमझिम में दौड़ते, पार्क में कबड्डी खेलते, और आंखमिचौली खेलते  बच्चे दुनिया भूल जाते थे। वो फुटबॉल की किक, गली में क्रिकेट की पिच, और दोस्तों संग बेफिक्र दिन सब जैसे फाख्ता हो गए हैं। आज बच्चों के … Read more

आशीर्वाद Important message for everyone

विषय: आशीर्वादमुक्तिका प्रकाशन आशीर्वाद, हमारे बड़ो या फिर दूसरों द्वारा हमें दिया गया शुभकामना है। अधिकतर हम देखते है कि बड़ों का पैर छूने पर हमें आशीर्वाद देते है। भारतीय संस्कृति में आशीर्वाद का बहुत महत्त्व है। कोई अच्छा काम करने करने पर भी आशीर्वाद मिलता है। आशीर्वाद का अर्थ है किसी के कल्याण की … Read more

काशी a beautiful poem on Muktika Publication

शीर्षक-कविताविषय-काशी रचना ये काशी है यहां लोग,ऐसे ही जीते और मरते है।।एक तरफ चिता जलती,एक तरफ शहनाई बजती है।।सभी भक्त भोले नाथ,के ही सहारे जीते है।।कुछ लोग भूखे तो,कुछ लोग खा के सोते है।।ये काशी है यहां लोग,ऐसे ही जीते और मरते है।।काशी के कण-कण में, बसे शिव शंभू दिखाई देते है।।काशी की गलियों में,जय … Read more

भगवान राम: आदर्श जीवन का प्रतीक पढ़े Muktika Publication पर

भगवान राम: आदर्श जीवन का प्रतीक भगवान राम भारतीय संस्कृति और सभ्यता का ऐसा आदर्श हैं, जो सत्य, धर्म, कर्तव्य, और मर्यादा का प्रतीक माने जाते हैं। उनका जीवन और उनकी शिक्षाएं न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि समाज में नैतिकता और आदर्शों की स्थापना के लिए भी प्रासंगिक हैं। भगवान राम का … Read more

किताबें कुछ कहना चाहती है Hindi Poetry On Muktika Publication

किताबें कुछ कहना चाहती है।किताबें करती है बातें,बीते जमाने की।दुनिया के इंसानों की,आज की, कल की।एक एक पल की।खुशियों की, ग़मों की।फूलों की, खुशबुओं की।जीत की, हार की।प्यार की, इजहार की।क्या तुम नहीं सुनोगे?इन किताबों की बातें,किताबें कुछ कहना चाहती है।तुम्हारे पास रहना चाहती है।किताबों में चिड़ियां चहचहाती है।किताबों में खेत लहलहाती है।किताबों में रॉकेट … Read more

हिन्दी के प्रति युवा पीढ़ी की अरुचि: समस्या और समाधान पढ़े Muktika Publication पर

हिन्दी के प्रति युवा पीढ़ी की अरुचि: समस्या और समाधान आज के समय में हिन्दी, जो हमारी मातृभाषा और सांस्कृतिक धरोहर है, धीरे-धीरे युवा पीढ़ी की प्राथमिकताओं से हटती जा रही है। इसके पीछे कई कारण हैं, जो न केवल समाज की बदलती धाराओं को दर्शाते हैं, बल्कि हमारी शिक्षा प्रणाली और सांस्कृतिक मूल्यों के … Read more

मनुष्य का घुसपैठ पढ़े Muktika Publication पर

मनुष्य का घुसपैठ मनुष्य का खान-पान एवं पहनावा उसके परिवेश, प्राकृतिक व्यवस्था एवं जलवायु परिवर्तन पर आधारित है। अतः धर्म, जाति, लिंग जैसे मानव द्वारा निर्मित सामाजिक विभाजनों से ना तो मनुष्य के खान-पान का कुछ लेना-देना है और ना ही मनुष्य के पहनावे का।क्या मनुष्य का पूर्ण रूप से शाकाहारी बन जाना तर्क संगत … Read more