Abhi is lekh ko 84 log padh rahe hain

आँचल की छाँव: माँ

Rekha Tomar • Superstar Writer • Sahitya Ratna
आँचल की छाँव: माँ

​”माँ”—यह सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि पूरी कायनात का सबसे अनमोल अहसास है। इस एक छोटे से अक्षर में ईश्वर का पूरा स्वरूप, निःस्वार्थ प्रेम की परिभाषा और दुनिया की हर मुश्किल से लड़ने की ताकत समाई होती है। माँ वह पवित्र रिश्ता है, जिसकी ममता के आगे समय, उम्र और दुनिया के सारे बंधन छोटे पड़ जाते हैं।

​ममता की मूरत और जीवन का पहला पाठ

​जब एक शिशु इस दुनिया में कदम रखता है, तो उसे कुछ नहीं पता होता—न इस संसार की धूप के बारे में, न यहाँ की छाँव के बारे में। उसे बस एक ही खुशबू और एक ही स्पर्श पहचान में आता है, और वह होती है उसकी माँ। माँ की गोद इस दुनिया का सबसे सुरक्षित कोना होती है, जहाँ पहुँचते ही हर डर, हर रोना और हर दर्द पलभर में गायब हो जाता है।
​माँ सिर्फ हमें जन्म देने वाली शख्सियत नहीं है, बल्कि वह हमारी पहली गुरु, पहली दोस्त और जीवन भर की मार्गदर्शक होती है। उंगली पकड़कर चलना सिखाने से लेकर, जिंदगी के थपेड़ों के बीच खुद खड़े रहना सिखाने तक, माँ हर कदम पर हमारी ढाल बनकर खड़ी रहती है।

​निःस्वार्थ प्रेम का सागर

​इस संसार में यदि कोई ऐसा रिश्ता है जहाँ किसी भी प्रकार के स्वार्थ, शर्त या अपेक्षा के लिए कोई जगह नहीं है, तो वह माँ का रिश्ता है। एक माँ अपनी पूरी ज़िंदगी अपने बच्चों की खुशियों के नाम कर देती है।
​वह खुद भूखी रहकर अपने बच्चों को पेट भरकर खाना खिलाती है।
​वह खुद रातों को जागकर अपने बच्चे की सेहत और सुकून की दुआ मांगती है।
​वह बच्चों की हर गलती को माफ़ कर देती है और उनकी हर सफलता पर सबसे ज्यादा गर्व महसूस करती है।
​उसका प्यार किसी तराजू में तौला नहीं जा सकता। बच्चे चाहे जितने भी बड़े हो जाएं, दुनिया की नजर में भले ही वे कामयाब या नाकाबायब हों, लेकिन माँ की नजर में वे हमेशा वही छोटे बच्चे रहते हैं जिन्हें उसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

Isse bhi padhein : उम्मीदों का रोशन चिराग

​त्याग और समर्पण की प्रतिज्ञा

​माँ का जीवन संघर्ष और त्याग की एक लंबी दास्तान होता है। अपने बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए वह अनगिनत रातों की नींद और अपनी कई इच्छाओं का त्याग कर देती है। उसके माथे पर पड़ी झुर्रियां और हाथों की लकीरें इस बात का गवाही देती हैं कि उसने अपनी जिंदगी का हर पल अपनों को सींचने में लगा दिया।
​जब घर में कोई संकट आता है, तो एक माँ चट्टान की तरह खड़ी हो जाती है। उसकी सहनशक्ति और धैर्य देखकर कभी-कभी अचंभा होता है कि इतनी कोमल सी काया में इतनी असीम शक्ति कहाँ से आती है। वह अपने आंसुओं को छुपाकर चेहरे पर एक मुस्कान ले आती है, ताकि उसके बच्चों की दुनिया कभी नगमई न पड़े।

​समय की रेत और अनमोल रिश्ते

​बचपन बीतता है, जवानी आती है और बच्चे अपनी दुनिया में व्यस्त हो जाते हैं। कई बार भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपनी माँ को वो वक्त नहीं दे पाते जिसकी वह हकदार होती है। लेकिन माँ का दिल समंदर जैसा विशाल होता है; वह कभी शिकायत नहीं करती, बस दरवाजे की ओर टकटकी लगाए अपने बच्चों का इंतजार करती रहती है।
​वक्त बहुत तेज़ है, और यह सच्चाई हमें कभी नहीं भूलनी चाहिए कि माँ हमेशा हमारे साथ नहीं रहेगी। इसलिए जब तक वह हमारे पास हैं, उनकी गोद में सिर रखकर सुकून के दो पल बिताना, उनकी परवाह करना और उनके माथे पर प्यार से हाथ फेरना हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य होना चाहिए।

​निष्कर्ष

​माँ के आंचल की छाँव इस दुनिया का सबसे बड़ा वरदान है। जिसके सिर पर माँ का हाथ है, उसे इस दुनिया में किसी भी चीज से डरने की जरूरत नहीं है। माँ का होना ही इस बात का प्रमाण है कि ईश्वर हमसे कितना प्यार करता है। आइए, हम सब अपनी माँ को हमेशा खुश रखें, उनका सम्मान करें और उन्हें यह अहसास कराएं कि वे हमारे लिए कितनी अनमोल हैं।
​— लेखिका रेखा तोमर

Email

Whatsapp Number : usp_whatsapp : 9131075651

✍️✨

Support Writer

Agar Rekha Tomar ki is rachna ne aapke hriday ko chhua ho, toh unki kalam aur sahityik prayas ko aage badhane hetu ek chhota sa sneha-sammaan bhent karein:

(GPay, PhonePe, Paytm, ya kisi bhi UPI app dwara seedhe surakshit bhent)
Rachnakar Ka Manobol Badhayein
Taali baja kar utsah vardhan karein
36 CLAPS

Leave a Comment

Author

Muktika Sahityakar