आज की ‘मन की बात’ में हम इंसान और जानवर के बीच एक बहुत ही गहरे और अद्भुत विषय पर विचार करेंगे। आज सुबह जब मैं टहलने गयी थी, तो मुझे एक कुत्ता मिला जिसके मालिक उसे घुमा रहे थे। तभी एक दूसरा कुत्ता भी अपने मालिक के साथ वहां आया। दोनों के मालिक अलग-अलग देश के थे और वे एक-दूसरे की भाषा नहीं समझते थे।
दोनों कुत्ते जब मिले तो एक-दूसरे को देखकर भौंकने लगे। मैंने देखा कि दोनों बिल्कुल एक ही तरह से भौंक रहे हैं, जबकि दोनों के मालिक अलग-अलग भाषा बोल रहे थे। तब मैं सोचने पर मजबूर हो गयी कि ऐसा क्यूँ?
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इंसान और जानवर: कुदरत का अनोखा नियम
आपने देखा होगा कि जानवर चाहे कहीं के भी निवासी हों—चाहे भारत के, अमेरीका के, यूरोप के, या फिर अफ्रीका के ही क्यूँ ना हों! वे दुनिया में कहीं भी रहते हों, सब एक जैसे दिखते हैं। वे अपनी नस्ल के अनुसार ही दिखते हैं। उदाहरण के लिए, लैब्राडोर नस्ल का कुत्ता पूरी दुनिया में कहीं भी रहे, एक सा ही दिखता है।
इसी तरह से किसी भी जानवर को ले लीजिए, वे पूरी दुनिया में कहीं भी रहें पर दिखते एक से हैं और उनकी बोली भी एक सी होती है। वे एक सी आवाज निकालते हैं।

इंसान और जानवर
इंसानों के बीच इतना भेदभाव कैसे?
पर अफसोस, इंसानों के साथ ऐसा नहीं है। इंसान और जानवर में यही सबसे बड़ा फर्क दिखाई देता है। एशिया के निवासी यूरोप के निवासियों से बिल्कुल अलग हैं। अफ्रीका के निवासी सबसे अलग हैं। अमेरिकन अलग ही दिखते हैं, और उनकी भाषा भी बिलकुल अलग है।
एक देश के निवासी एक भाषा बोलते हैं तो दूसरे देश के दूसरी भाषा बोलते हैं। यहाँ तक कि उनकी भेष-भूषा, उनका पहनावा, उनका खान-पान, रीति-रिवाज सब कुछ अलग है। ऐसा कैसे हो गया?
कहते हैं इंसान सबसे बुद्धिमान प्राणी है, तो फिर उसने ऐसा होने कैसे दिया? ये भेदभाव हो कैसे गया? अगर हम सबसे बुद्धिमान हैं, तो हमने सबको जोड़ कर क्यूँ नहीं रखा? सारी दुनिया में इंसान एक सी भाषा क्यूँ नहीं बोलता है? हम सब अलग-अलग क्यूँ दिखते हैं?
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क्या यह सिर्फ वातावरण का असर है?
अगर ये महज़ वातावरण का असर है, तो इसका असर जानवरों पर उस तरह क्यों नहीं हुआ? फिर हम इंसानों पर ही इसका इतना गहरा असर क्यूँ हुआ कि हम सब अलग-अलग हो गए और हम एक-दूसरे समुदाय के खून के प्यासे हो गये?
हम दूसरों को अपना शत्रु मानने लगे। हम सबसे बुद्धिमान थे, तो हमने बुद्धिमानी वाली बात क्यूँ नहीं की? सबको एक क्यूँ नहीं रखा? कुदरत ने हमें इस तरह अलग-अलग क्यूँ कर दिया?
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जानवरों से हमें क्या सीखना चाहिए?
हम इंसान अपनी बुद्धि का इस्तेमाल भौतिक विकास में तो कर रहे हैं, लेकिन आपसी प्रेम में नहीं। जानवर बिना किसी स्वार्थ के अपना जीवन जीते हैं। वे केवल कुदरत के नियमों का पालन करते हैं। लेकिन इंसान ने अपनी अलग दुनिया, अपनी अलग सीमाएं और अलग नियम बना लिए हैं। इन सीमाओं ने ही हमें एक-दूसरे से दूर कर दिया है। जानवर केवल अपनी भूख और सुरक्षा के लिए लड़ते हैं, लेकिन इंसान अपने अहंकार, जाति, धर्म और सीमाओं के लिए लड़ता है।
अगर हम वाकई में दुनिया के सबसे श्रेष्ठ और बुद्धिमान प्राणी हैं, तो हमें प्रकृति और जानवरों से यह सीखना चाहिए कि एक होकर कैसे रहा जाता है। हमें यह गहराई से विचार करना होगा कि हमारी यह तथाकथित बुद्धिमानी हमें विनाश की ओर ले जा रही है या विकास की ओर। कुदरत ने हम सबको एक ही धरती पर जन्म दिया है, एक ही हवा और पानी दिया है, फिर हमने यह दूरियां क्यों बनाई? आइए, आज इस विचार के साथ हम यह प्रयास करें कि हम इंसानियत को सबसे ऊपर रखेंगे और आपसी भेदभाव को मिटाकर पूरी दुनिया को एक परिवार मानेंगे।
मेरी समझ में तो ये नहीं आता है, पर यह विषय विचार करने योग्य जरूर लगता है। आप भी इस पर विचार कीजिए!
धन्यवाद 🙏
भावना भट्ट
(प्रस्तुति नंबर – 7, गुरुवार)








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