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खामोश जवाब रह गया

Gunjan Johri • Superstar Writer • Sahitya Ratna

खामोश जवाब रह गया

आंसुओं ने पूछ ही लिया, क्या मिला तुझे चुनकर,
जिसे बचाने में उम्र गुज़री, वही अरमान रह गया,,

रूह ने चाहा था कि सबके दर्द अपने नाम कर लूं,
पर बचाते-बचाते ख़ुद का ही वजूद बेज़ुबान रह गया,,

कुछ फैसले होते हैं, जो लफ्ज़ों में ढलते नहीं,
दिल तो ज़िंदा रह गया, मगर सुकून बेजान रह गया,,

जिंदगी का सबसे मुश्किल फ़ैसला था ख़ुद को चुनना,
सबको अपना मानते-मानते, खुद से ही फ़ासला रह गया,,

न किसी से कोई शिकवा, न मुक़द्दर से गिला,
बस एक टूटा हुआ सपना, मेरी रूह में सवाल रह गया,,

मैंने चाहा था कि हर रिश्ता मेरी सांसों में रहे,
पर जिसे भी थामना चाहा, वही हाथों से फिसलकर चला गया,,

अब न मंज़िल की तमन्ना, न किसी राह का गुमां,
जिंदगी एक इम्तिहान थी,और ख़ामोश जवाब रह गया,,

𝒢𝓊𝓃𝒿𝒶𝓃 𝒿ℴ𝒽𝓇𝒾

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Author

Muktika Sahityakar