मुक्तिका पब्लिकेशन द्वारा आतंकवाद नहीं सहेंगे काव्यपाठ एवं परिचर्चा सम्पन्न हुई

मुक्तिका पब्लिकेशन परिवार द्वारा पहलगाम आतंकवादी हमले में मारे गए निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आतंकवाद नहीं सहेंगे कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसके संस्थापक अजय कुमार द्विवेदी , कानपुर , उ. प्र. एवं सह संस्थापक ममता जायसवाल रायपुर, छत्तीसगढ़ एवं सभी रचनाकारों ने दो मिनट का मौन द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की।कार्यक्रम की … Read more

कलयुग- एकता चतुर्वेदी Emotional Poetry by Muktika Publication

शीर्षक-कलयुग यहां सत्य का कोई साथी नहीं,सब बन बैठे असत्य के साथी है,यहां रिश्तों का कोई मोल नहीं,आया देखो ये कैसा कलयुग है।।पति के जाते ड्यूटी पर पत्नी,गैर मर्द के साथ रात बिताती है,यहां कोई रिश्तों का मोल नहीं,आया देखो ये कैसा कलयुग है।।यहां पति भी पत्नी से कम नहीं,वो भी देता पत्नी को खूब … Read more

डा .भीमराव अंबेडकर (संविधान निर्माता)- श्रीनिवास एन Motivational Poetry only on Muktika Publication

डा .भीमराव अंबेडकर (संविधान निर्माता)दलित कुटुंब में जन्म लिए थेवे कई क्लेशों से पीड़ित थेक्लेशों को हल कर आगे बढ़े थेऔर कई डिग्रियों को प्राप्त थेवे दलित नेता अम्बेडकर हैं।दलित लोगों का भगवानसब केलिए आदर्शवानसंघ में छुआ छूत को निर्मूलनदलित लोगों केलिए विद्वानसमाज सुधारक बने थे।वे विश्व मेधावी बने थेन्यायवादी मैं प्रसिद्द थेड्रॉपिंग कमिटी के … Read more

कलयुग कविता- Dr. Rishika Verma Beautiful Poem only on Muktika Publication

विषय: कलयुगकलयुग है ये धर्म की डोरी कमजोर है, पापों की अब भरमार है,सत्य ढूँढने निकले जो, पथ में उनके अंधकार है।नेता बोले मीठे बोल, भीतर लेकिन विष का जाल है,नीति, मर्यादा, शर्म-संकोच सब यहाँ बिकते है सब दलाल है। लोभ बना है भगवान यहाँ, माया ने सबको घेरा है। रिश्ते-नाते छूट गए हैं, मतलब … Read more

हनुमान जन्मोत्सव- Sunitha Viswanaathan Poetry only on Muktika Publication

हनुमान जन्मोत्सवहनुमान, शक्ति के सागर, भक्ति के सच्चे सिपाही,जिनकी भक्ति की गूंज, जैसे गूंजे गगन में गूढ़ राही।राम के चरणों में बसी, उनकी अनन्य निष्ठा,जन्मोत्सव मनाते हम, करते हैं उनकी आराधना।जन्मोत्सव का यह पर्व, जैसे बहारों की पहली किरण,संग लाता है सबको, जैसे चाँद लाए रात की चादर।भक्ति की महक से महके, हर गली, हर … Read more

संसार- सृष्टि राठौर beautiful poetry on Muktika Publication

अर्ज किया है..आप ने रचा है संसार को,आप के बिना संसार कहा,आपके चरणो की धुल भी सोना लगे,आपसे मिलने के बाद अहंकार कहा,अल्लाह, भगवान, जीसस अनेकों नाम है आपके,आपका एक नाम कहां,आप साथ रहते हो हमेशा मेरे, और कोई मेरे साथ कहां, हज़ारों शूरवीरों से परे,कोई आपसे ज्यादा बलवान कहां,आपके इशारे के बिना एक पत्ता … Read more

काशी a beautiful poem on Muktika Publication

शीर्षक-कविताविषय-काशी रचना ये काशी है यहां लोग,ऐसे ही जीते और मरते है।।एक तरफ चिता जलती,एक तरफ शहनाई बजती है।।सभी भक्त भोले नाथ,के ही सहारे जीते है।।कुछ लोग भूखे तो,कुछ लोग खा के सोते है।।ये काशी है यहां लोग,ऐसे ही जीते और मरते है।।काशी के कण-कण में, बसे शिव शंभू दिखाई देते है।।काशी की गलियों में,जय … Read more

किताबें कुछ कहना चाहती है Hindi Poetry On Muktika Publication

किताबें कुछ कहना चाहती है।किताबें करती है बातें,बीते जमाने की।दुनिया के इंसानों की,आज की, कल की।एक एक पल की।खुशियों की, ग़मों की।फूलों की, खुशबुओं की।जीत की, हार की।प्यार की, इजहार की।क्या तुम नहीं सुनोगे?इन किताबों की बातें,किताबें कुछ कहना चाहती है।तुम्हारे पास रहना चाहती है।किताबों में चिड़ियां चहचहाती है।किताबों में खेत लहलहाती है।किताबों में रॉकेट … Read more

देवउठनी एकादशी का महत्त्व (तुलसी विवाह) विशेष पढ़े Muktika Publication पर

देवउठनी एकादशी का महत्त्व (तुलसी विवाह)हिंदू धर्म में देवउठनी एकादशी का विशेष महत्त्व है। इसे हरि प्रबोधिनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी, या देवउठनी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व भगवान विष्णु के चार महीनों की योगनिद्रा के बाद जागने का प्रतीक है। ऐसी मान्यता है कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल … Read more