कविता का खेत

यह कविता एक कवि के उस भाव-संसार की यात्रा है, जहाँ वह शब्दों में सपनों और प्रेम के फूल उगाना चाहता है, लेकिन दर्द और काँटों से सामना होता है। फिर भी उसकी कलम उम्मीद नहीं छोड़ती और नए सृजन की आस बनाए रखती है।

मेरी कलम मेरी पहचान ✍🏼

मेरी कलम सिर्फ शब्द नहीं लिखती, मेरे मन के भावों को आवाज़ देती है। दर्द को शक्ति, मौन को अभिव्यक्ति और सपनों को विश्वास देती है। मेरे लिए कलम ही मेरा स्वाभिमान, मेरी रूह और मेरी सबसे सच्ची पहचान है। ✍🏼❤️

माँ की ओढ़नी

माँ, आँचल,त्याग, मातृ *1- माँ की ओढ़नी* बरसों से मौसम आते-जाते, माँ का मौसम एक रहा, खुद भीगती रही सदा, मुझ पर उसका स्नेह रहा। साड़ी की छोटी-सी छाया, मेरे लिए आकाश बनी, उसकी हर भीगी हुई सिलवट, मेरी जीवन-ढाल बनी। मैंने बारिश देखी केवल, उसने चिंता की बूँदें ओढ़ीं, मेरे हिस्से धूप बचाने, अपनी सारी खुशियाँ छोड़ी। माँ का आँचल छत नहीं, ईश्वर का ही विस्तार है, जिसकी छाया में मिट जाए हर भय, हर संताप है। जब भी जीवन आँधी बनकर, मेरे साहस को परखेगा, एक भीगी माँ का आँचल ही मुझे सँभालेगा। ममता का मूल्य कहाँ मिलता, धन-दौलत के बाज़ारों में, माँ हर मौसम भीग जाती है… सिर्फ़ बच्चों की मुस्कानों में।प्रेम