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Ocotber life

Vidhi saini • Superstar Writer • Sahitya Ratna

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अक्टूबर: एक महीना, हज़ार खुशियाँ और मेरी ज़िंदगी का सबसे ख़ास एहसास

कुछ महीने कैलेंडर में सिर्फ़ तारीख़ें लेकर आते हैं, और कुछ अपने साथ यादें, खुशियाँ,

अक्टूबर: एक महीना, हज़ार खुशियाँ और मेरी ज़िंदगी का सबसे ख़ास एहसास

कुछ महीने कैलेंडर में सिर्फ़ तारीख़ें लेकर आते हैं, और कुछ अपने साथ यादें, खुशियाँ, उम्मीदें और एक अलग ही सुकून लेकर आते हैं। मेरे लिए अक्टूबर भी ऐसा ही एक महीना है—सबसे ख़ास, सबसे अपना और दिल के बेहद क़रीब।

वैसे तो अक्टूबर मेरे लिए ख़ास इसलिए भी है, क्योंकि इसी महीने मेरा जन्मदिन आता है। लेकिन सच कहूँ, तो अक्टूबर से मेरा रिश्ता सिर्फ़ मेरे जन्मदिन तक सीमित नहीं है। इस महीने में कुछ तो ऐसा है, जो हर साल मेरे भीतर एक नई ऊर्जा भर देता है। जैसे ज़िंदगी धीरे से कहती हो—चलो, एक नई शुरुआत करते हैं!

मूलांक 8: जिसे दुनिया अशुभ कहती है, वह मुझे अपना लगता है

मेरा जन्मदिन और मेरा मूलांक, दोनों मेरे लिए बहुत ख़ास हैं। मेरा मूलांक 8 है। अक्सर लोगों ने मुझसे कहा है कि 8 को अशुभ अंक माना जाता है, लेकिन मैंने कभी इसे अपनी कमज़ोरी या बदकिस्मती नहीं माना।

पता नहीं क्यों, लेकिन मुझे अपनी जन्मतिथि से हमेशा एक अलग ही लगाव रहा है। शायद इसलिए, क्योंकि यह सिर्फ़ एक तारीख़ नहीं, बल्कि मेरी ज़िंदगी की शुरुआत का दिन है।

दुनिया किसी अंक को अच्छा या बुरा कहे, लेकिन मेरे लिए उसकी अहमियत मेरे विश्वास और मेरे एहसासों से है। मैं अपनी जन्मतिथि को दिल से पसंद करती हूँ और हर साल इसका इंतज़ार किसी छोटे बच्चे की तरह करती हूँ, जो अपने पसंदीदा त्योहार का इंतज़ार कर रहा हो।

और शायद इसी वजह से, जैसे ही अक्टूबर शुरू होता है, मेरे भीतर एक अलग ही उत्साह जागने लगता है।

अक्टूबर सिर्फ़ जन्मदिन का महीना नहीं, त्योहारों का मौसम है

अक्टूबर की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यह अपने साथ कितने सारे रंग लेकर आता है।

श्राद्ध पक्ष के समाप्त होते ही शारदीय नवरात्रि की रौनक शुरू हो जाती है। घरों में पूजा की तैयारियाँ, मंदिरों में भक्ति, गलियों में सजावट और हर तरफ़ एक अलग ही सकारात्मक माहौल बन जाता है।

फिर आता है दशहरा, जो हमें याद दिलाता है कि बुराई चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अंत में जीत अच्छाई की ही होती है।

और इन सबके बीच मेरा जन्मदिन!

कभी-कभी तो ऐसा लगता है, जैसे मेरे जन्मदिन को भी त्योहारों की भीड़ में अपनी एक ख़ास जगह मिली हो। इस बार भी मेरा जन्मदिन शारदीय नवरात्रि की सप्तमी के दिन पड़ रहा है। एक तरफ़ जन्मदिन मनाने की उत्सुकता है, तो दूसरी तरफ़ परीक्षाओं की चिंता।

दिल कहता है कि ख़ूब तैयारियाँ करूँ, ख़ुद को ख़ास महसूस कराऊँ और इस दिन को यादगार बनाऊँ। वहीं दिमाग़ याद दिलाता है कि किताबें भी मेरा इंतज़ार कर रही हैं!

लेकिन शायद ज़िंदगी का असली मज़ा भी इसी में है—ख़ुशियों और ज़िम्मेदारियों को एक साथ जीना।

अपराजिता के फूल: ख़ामोशी से खिलना और ख़ुद ही गिर जाना

अक्टूबर की ख़ूबसूरती की बात हो और फूलों का ज़िक्र न हो, ऐसा कैसे हो सकता है?

मुझे अपराजिता के फूल बहुत सुंदर लगते हैं। उनका नीला रंग ऐसा लगता है, मानो आसमान का कोई छोटा-सा टुकड़ा धरती पर उतर आया हो। उनकी सुंदरता में एक अलग ही सादगी है। न कोई दिखावा, न कोई शोर—बस अपनी जगह खिलते रहना।

अपराजिता के फूलों की एक ख़ास बात यह भी है कि उनके मुरझाए फूल कई बार पौधे से ख़ुद ही झड़ जाते हैं। उन्हें देखकर मन में एक सुंदर-सा विचार आता है—हर चीज़ को हमेशा थामकर रखना ज़रूरी नहीं होता। कुछ चीज़ें अपना समय पूरा करके ख़ुद ही विदा हो जाती हैं, ताकि जीवन में नई कलियों और नए फूलों के लिए जगह बन सके।

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शायद ज़िंदगी भी ऐसी ही है। कुछ पुराने दुख, कुछ अधूरी इच्छाएँ और कुछ बीती हुई बातें एक समय के बाद पीछे छूट जाती हैं। हम चाहें या न चाहें, समय हमें आगे बढ़ना सिखा ही देता है।

और अक्टूबर मुझे हर साल यही एहसास दिलाता है कि खिलना भी ज़रूरी है, और सही समय पर ख़ुद को बदलने देना भी।

अक्टूबर और मेरा किताबों से गहरा रिश्ता

एक तरफ़ अक्टूबर त्योहारों और जन्मदिन की ख़ुशियाँ लेकर आता है, तो दूसरी तरफ़ मेरी ज़िंदगी में परीक्षाओं का मौसम भी साथ ले आता है।

मेरे लिए यह महीना थोड़ा अजीब है। कभी मन करता है कि बस त्योहारों की रौनक में खो जाऊँ, कभी जन्मदिन की तैयारियों के सपने देखने लगती हूँ और कभी अचानक याद आता है कि परीक्षाएँ सिर पर हैं।

लेकिन सच कहूँ, तो अक्टूबर में पढ़ाई के प्रति मेरा मन अपने आप लगने लगता है। शायद बदलते मौसम का असर होता है, शायद सुबह-शाम की ठंडक का या फिर इस महीने के साथ जुड़ी नई शुरुआत की भावना का।

जैसे ही मौसम में हल्की ठंडक घुलने लगती है, सुबह की हवा थोड़ी सुहानी हो जाती है और शामें पहले से ज़्यादा ख़ूबसूरत लगने लगती हैं, वैसे ही मेरा मन भी किताबों की तरफ़ खिंचने लगता है।

किताबों के पन्ने, चाय का एक कप, खिड़की से आती ठंडी हवा और मन में अपने भविष्य के सपने—इन सबके बीच अक्टूबर की शामें कुछ अलग ही लगती हैं।

कभी लगता है कि इस महीने में जितना पढ़ लूँ, उतना कम है। और कभी मन कहता है कि ज़िंदगी सिर्फ़ परीक्षाओं के लिए नहीं, इन छोटे-छोटे ख़ूबसूरत पलों को जीने के लिए भी है।

शायद यही संतुलन सीखना ही बड़ा होना है।

अक्टूबर की सुबहें, फूलों की ख़ुशबू और सर्दियों की आहट

अक्टूबर आते ही मौसम धीरे-धीरे अपना रंग बदलने लगता है। दिन में हल्की धूप अच्छी लगने लगती है और शाम की हवा में सर्दियों की आहट सुनाई देने लगती है।

प्रकृति भी जैसे किसी नए उत्सव की तैयारी में जुट जाती है। कहीं फूल खिल रहे होते हैं, कहीं खेतों में नई गतिविधियाँ शुरू होने लगती हैं और कहीं किसान आने वाली फसल के सपने सँजो रहे होते हैं।

गाँवों में खेतों की हलचल, शहरों में त्योहारों की रौनक, बच्चों की छुट्टियों का उत्साह और घरों में पकवानों की ख़ुशबू—अक्टूबर हर किसी के लिए कुछ न कुछ लेकर आता है।

यह महीना सिर्फ़ मौसम नहीं बदलता, बल्कि लोगों के मन में भी एक नई उमंग भर देता है।

किसी के लिए यह फ़सल की उम्मीद है, किसी के लिए परीक्षा की तैयारी, किसी के लिए त्योहारों की ख़ुशी और किसी के लिए अपने जन्मदिन का इंतज़ार।

हर किसी की कहानी अलग है, लेकिन अक्टूबर की ख़ुशी में कहीं न कहीं सबकी एक छोटी-सी हिस्सेदारी ज़रूर है।

दिवाली का इंतज़ार और नए साल के सपने

साल भर मुझे त्योहारों का इंतज़ार रहता है, लेकिन दिवाली की बात ही कुछ और है।

दीयों की रोशनी, घरों की सजावट, रंगोली के रंग, मिठाइयों की ख़ुशबू और अपनों के साथ बिताए पल—दिवाली अपने साथ ऐसी ख़ुशियाँ लाती है, जिन्हें शब्दों में पूरी तरह बयाँ करना मुश्किल है।

और अक्टूबर की बात ही इसलिए ख़ास है, क्योंकि यह हमें दिवाली के और क़रीब ले आता है।

इसी महीने से मन में आने वाले दिनों की योजनाएँ बनने लगती हैं। लगता है कि साल धीरे-धीरे अपनी विदाई की ओर बढ़ रहा है। कुछ महीने ही तो बचे हैं, फिर एक नया साल सामने होगा।

और नया साल आते ही हम फिर से ख़ुद से वादे करेंगे।

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इस साल यह करेंगे, वह करेंगे। अपनी आदतें सुधारेंगे, अपने सपनों के लिए मेहनत करेंगे, कुछ नया सीखेंगे और अपनी ज़िंदगी को पहले से बेहतर बनाने की कोशिश करेंगे।

कितनी अजीब बात है न? हर साल हम नई शुरुआत का इंतज़ार करते हैं, जबकि शुरुआत करने के लिए किसी ख़ास तारीख़ की ज़रूरत नहीं होती।

फिर भी, कुछ महीने और कुछ तारीख़ें हमारे भीतर उम्मीद जगाने का हुनर रखती हैं। मेरे लिए अक्टूबर उन्हीं में से एक है।

अक्टूबर: मेरे लिए एक एहसास, सिर्फ़ एक महीना नहीं

जब मैं अक्टूबर के बारे में सोचती हूँ, तो मेरे मन में सिर्फ़ अपना जन्मदिन नहीं आता।

मुझे त्योहारों की रौनक याद आती है। नवरात्रि की भक्ति याद आती है। अपराजिता के नीले फूल याद आते हैं। किताबों के साथ बिताया समय याद आता है। सर्दियों की पहली आहट, दिवाली की रोशनी और आने वाले नए साल के सपने याद आते हैं।

और इन सबके बीच एक ख़ूबसूरत एहसास यह भी है कि मैं अपनी ज़िंदगी का एक और साल पूरा करने जा रही हूँ।

एक और साल, जिसमें मैंने कुछ सीखा होगा, कुछ खोया होगा, कुछ पाया होगा और कुछ सपने अब भी अधूरे रखे होंगे।

लेकिन कोई बात नहीं। ज़िंदगी का मतलब हर चीज़ को एक ही साल में पूरा कर लेना नहीं है। कभी-कभी बस आगे बढ़ते रहना, ख़ुद पर विश्वास रखना और छोटी-छोटी ख़ुशियों को महसूस करना ही बहुत होता है।

मेरे लिए अक्टूबर हर साल यही करता है। यह मुझे बीते हुए समय की याद दिलाता है, वर्तमान की ख़ुशियाँ देता है और आने वाले कल के लिए उम्मीद जगाता है।

और शायद इसी वजह से मुझे यह महीना इतना पसंद है।

क्योंकि अक्टूबर मेरे लिए सिर्फ़ मेरे जन्मदिन का महीना नहीं है, यह मेरी यादों, मेरे सपनों, मेरी मेहनत, मेरे त्योहारों और मेरी नई शुरुआतों का महीना है।

यह वह महीना है, जिसमें मैं ख़ुद को थोड़ा और समझती हूँ, अपनी ज़िंदगी को थोड़ा और महसूस करती हूँ और आने वाले कल के लिए थोड़ा और उम्मीद से भर जाती हूँ।

तो स्वागत है अक्टूबर!

मेरे पसंदीदा महीने, मेरे जन्मदिन, मेरी किताबों, मेरे त्योहारों और मेरी अनगिनत उम्मीदों के महीने।

तुम हर साल आना, इसी तरह फूलों की ख़ुशबू, ठंडी हवाओं, रोशनी और नई शुरुआतों के साथ।

क्योंकि तुम्हारे आते ही मुझे लगता है कि ज़िंदगी में अभी बहुत कुछ सुंदर होना बाक़ी है।

— अक्टूबर, तुम सिर्फ़ एक महीना नहीं, मेरे दिल का सबसे ख़ूबसूरत मौसम हो।

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Muktika Sahityakar