Bhawana Bhatt (Star Writer)
प्रतिदिन लेखन विषय
29-9-26
मेरा परिवार
परिवार क्या है?
परिवार एक एसी सामाजिक संस्था है जहाँ पर आपको हर वर्ग के लोग एक साथ रहते, खाते और अपना जीवन यापन करते हुए दिख जाएंगे। किसी भी परिवार में सारे लोग एक समान नहीं होते हैं। परिवार में कुछ बुजुर्ग होते हैं, कुछ नवजवान होते हैं और कुछ बच्चे होते हैं। मतलब हर आयु वर्ग के लोग हर विचार धारा के लोग मिल जाएंगे।
परिवार के हर सदस्य का व्यवहार अलग होता है कोई गुस्सैल होता है तो कोई एक्दम शांत। तो कोई अल्हड़ और चंचल। ये सब एक जगह जब आराम और सुकून से जीवन यापन करते हैं तो उसे हम परिवार कहते हैं।
परिवार कैसा होना चाहिए ?
परिवार एसा होना चाहिए जैसे एक हाथ का पंजा होता है। जिस तरह हाथ के पंजे की सारी अंगुलियाँ अलग – अलग तरह की होती है जैसे कोई छोटी होती है को कोई सबसे लम्बी कोई पतली है तो कोई मोटी। पर जब काम करने का समय आए तो सब मिल कर एक साथ काम करते हैं और दुश्मन के लिए तो सब अपनी शक्ति को जोड़कर एक मुक्का बना लेते हैं। जिससे उनकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है और जबर्दस्त प्रतिकार कर सकती है । परिवार भी बिलकुल एसा ही होना चाहिए।
Read more : मेरा परिवार
परिवार की आवश्यकता क्यूँ होती है
इंसान एक सामाजिक प्राणी है। वह अकेला नहीं रह सकता है, उसे एक साथी की हमेशा जरूरत पड़ती है। इंसान को बोलने के लिए, अपना सुख – दुख साझा करने के लिए किसी की जरूरत होती है। इसलिए वह परिवार बनाता है। नये लोगों से रिश्ता बनाता है। अपने साथ नये लोगों को जोड़ता है। जब कुछ लोग इक्कठे होकर रहने लगते हैं तो उसे हम परिवार कहते हैं।
मेरा परिवार
हर इंसान का अपना परिवार होता है। मेरा भी एक छोटा सा परिवार है। जिसमें बच्चे भी हैं नौजवान भी हैं और बुजुर्ग भी है। हम सब मिलजुल कर रहते हैं। बच्चे बड़ों का आदर करते हैं उनकी हर बात को सुनते और समझते हैं तो, बुजुर्ग बच्चों को सही मार्गदर्शन देते हैं। उन्हें अपनी जिंदगी के अनुभवों से उचित या अनुचित का बोध कराते हैं। अपने अनुभव से उनकी समस्या का निराकरण करते हैं। और उन्हें प्यार करते हैं।
Read More : अधूरे सपने
एक परिवार तभी सुखी और प्रसन्नचित रह सकता है जब वहाँ बच्चों के चेहरे पर खिलखिलाहट और बुजुर्गों के चेहरे पर मुस्कान और नवजवानों के चेहरे पर इन्हें देखकर कर सुकून आए तभी एक परिवार उत्तम परिवार हो सकता है। विरोधाभास तो कहीं भी हो सकता है। जरूरी नहीं एक बात पर विरोधाभास हो तो दूसरे में सहमति बने ही ना। एसा कभी नहीं होता है। इसलिए विरोध को एक समय सीमा के बाद छोड़ देना चाहिए और आगे बढ़ते रहना चाहिए। क्योंकि जिंदगी में यही एक अवसर तो नहीं है। आगे भी अवसर मिलते रहेंगे।
इसलिए विरोधी बनने से अच्छा से पारिवारिक बने। परिवार में साथ रहने के लिए झुकना भी पड़े तो झुक जाईए। वरना आपको दुनिया के सामने झुकना पडेंगा क्योंकि तब आप अकेले होंगे ये जालिम दुनिया आपको अपने ठोकरों पर रखने के लिए बेताब रहेगी। एक परिवार ही एसी जगह है जहाँ आपको ठोकरों में नहीं सर पर सजाया जाता है। इसलिए कहते हैं मेरा परिवार है ये। मेरे सुख – दुख का साथी।।। धन्यवाद 🙏
भावना भट्ट
स्वरचित और मौलिक रचना
मेरे ब्लॉग को लाइक करे , कमेंट करे , मुझे फॉलो करे 💖
Whatsapp Number : usp_whatsapp : 9630040867
Support Writer
Agar Bhawana Bhatt ki is rachna ne aapke hriday ko chhua ho, toh unki kalam aur sahityik prayas ko aage badhane hetu ek chhota sa sneha-sammaan bhent karein:








1 thought on “मेरा परिवार”