इन आँखों में मेरा जहाँ है
तुम्हारी आँखों में कुछ तो बात है,
जो दिल को बार-बार रोक लेती है,
तुम सामने रहो तो नजर हटती नहीं,
और दूर रहो तो याद बहुत आती है।
काजल से सजी तुम्हारी आँखें,
जैसे कोई गहरी-सी शाम हों,
मैं उनमें जितना डूबता जाता हूँ,
उतनी ही खूबसूरत लगती हैं।
पलकों की वो हल्की-सी झुकन,
दिल पर जैसे दस्तक देती है,
तुम कुछ कहती नहीं हो फिर भी,
तुम्हारी नजर बहुत कुछ कह देती है।
खुले बाल जब चेहरे पर आते हैं,
तो तुम और भी प्यारी लगती हो,
हवा भी शायद ठहर जाती होगी,
जब तुम यूँ मुस्कुराती होगी।
होंठों पर ठहरी वो हल्की हँसी,
जैसे सुबह की पहली किरण हो,
तुम्हारे गालों की मासूम चमक,
जैसे प्यार का कोई मीठा मौसम हो।
साड़ी में तुम्हारा वो सादा रूप,
दिल को सबसे ज्यादा भाता है,
तुम जितना खुद को साधारण समझती हो,
उतना ही कोई तुम पर मर जाता है।
माथे की छोटी-सी बिंदी भी,
तुम्हारे चेहरे की शान बढ़ाती है,
और तुम्हारी एक मुस्कान,
मेरी पूरी शाम सजा जाती है।
काश तुम कभी मेरी आँखों से देखो,
खुद को कितना खूबसूरत पाओगी,
शायद तब तुम्हें भी यकीन होगा,
तुम सिर्फ खूबसूरत नहीं… मेरी पसंद हो।
कुंदन राज दत्ता “निश्छल”
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