*मनुहार:-*
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यूं हलक में अटकी सांसे है,
कैसे कहूं नजरे मिला ना पाऊं।
दिल की धड़कनों को कैसे समझाऊं ,
रूठे यार को में कैसे मनाऊं ।
मन में जाने क्या मलाल है ,
दिल में सवालों ने मचाया? बवाल है ।
क्यों वो इतनी दूर है अधर क्यों मौन है।
अहम के भर्म में पहले बोले कौन है।
अंखियों में जाने क्या तलाश है
मानों चेहरा मुरझाया पलाश है।
प्रीत की डोर कहीं छूट न जाए ,
काश वो बिन कहे चली न जाए।
रूठना मनाना तब अच्छा लगता है
जब यार का हाथों में हाथ होता है।
आज बस मैं चुप ना रहूंगा,
अंतर्मन की दूरियां मिटा के रहूंगा।
अपने प्यार का इजहार सबके सामने रखुगा,
उसे ना जाने दुगा ना किसी और कि होने दुगा।
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शिवा सिंहल आबुरोड







