शीर्षक,,दिल टूटा
#आज का विषय मन की शांति:-#
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बागियों के दिल कहां हुआ करते हैं,
क्यों मेरा नन्हा दिल धोखे में आया ।
कभी सोचा ना मैंने ऐसा प्यार पाया ,
इक मुद्दत के बाद वो बेवफा सामने आया ।
वो बेदर्दी दिल में आग लगा,
दूसरी गली में चिराग जला आया।
इन बेबस आंसुओं को कैसे समझाऊं,
जख्मी दिल पर कौन सा मरहम लगाऊं।
मुजरिम सा कटघरे में खड़ा प्यार मेरा,
बेवफा की सजा सुना गया वो चेहरा।
ये पूनम की रात अमावस सी लगने लगी,
अब ये तन्हा रातें कांटों सी चुभने लगी।
मन की शान्ति कहा से लाऊं,
जहां जाऊं वहां सबको दुःखी पाऊं।
अशांत मन में कौन प्रेम का चिराग जलाए,
हे कोई ऐसा आशिक जो मन को शांति दे जाए।
सब कुछ है पर मन की शांति ही तो नहीं है प्यारे,
तभी तो देखो लाखों डोल रहें हैं कुंवारे।
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शिवा सिंहल आबुरोड
शिवा सिंहल
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